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शीतला अष्टमी 2026: माँ शीतला के पूजन का अनुपम अवसर

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Sheetala Ashtami 2026: हर वर्ष चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी का पावन पर्व मनाया जाता है। यह दिन माँ शीतला को समर्पित है, जो स्वास्थ्य, आरोग्य और शीतलता प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं।

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शीतला अष्टमी 2026: माँ शीतला के पूजन का अनुपम अवसर

शीतला अष्टमी 2026: चूल्हा न जलाने की परंपरा और उसका महत्व

Sheetala Ashtami 2026: हर वर्ष चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी का पावन पर्व मनाया जाता है। यह दिन माँ शीतला को समर्पित है, जो स्वास्थ्य, आरोग्य और शीतलता प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं। इस वर्ष शीतला अष्टमी का पर्व 11 मार्च को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। इस विशेष दिन पर घरों में चूल्हा न जलाने और माता शीतला को ठंडा भोजन (बासी भोजन) अर्पित करने की एक अनूठी परंपरा है। यह परंपरा केवल एक रीति-रिवाज नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरा धार्मिक और वैज्ञानिक महात्म्य छिपा हुआ है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह पर्व स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और प्रकृति के साथ सामंजस्य का प्रतीक है।

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माँ शीतला को शीतलता अत्यंत प्रिय है। उन्हें गर्म भोजन या सामग्री अर्पित करना वर्जित माना गया है। इसलिए, शीतला अष्टमी से एक दिन पूर्व यानी सप्तमी तिथि को ही भोजन बना लिया जाता है, जिसे ‘बासोड़ा’ भी कहते हैं। अष्टमी के दिन इसी ठंडे और बासी भोजन का भोग माँ शीतला को लगाया जाता है और भक्तजन स्वयं भी इसी प्रसाद को ग्रहण करते हैं। यह परंपरा हमें यह संदेश देती है कि हमें प्रकृति के चक्र का सम्मान करना चाहिए और गर्मी के बढ़ते प्रकोप से बचाव के लिए शीतलता को अपनाना चाहिए। यह दिन बीमारियों, विशेषकर चेचक जैसी व्याधियों से मुक्ति के लिए माँ शीतला की आराधना का विशेष अवसर होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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शीतला अष्टमी का यह पर्व हमें स्वच्छ जीवनशैली अपनाने, शरीर को शीतलता प्रदान करने और विभिन्न रोगों से बचने का प्रेरणा देता है। इस दिन माँ शीतला को जल, दही, रबड़ी, चावल और अन्य शीतल खाद्य पदार्थ अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से माँ प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को निरोगी काया का आशीर्वाद देती हैं। इस दिन नीम के पेड़ की पूजा का भी विधान है, क्योंकि नीम को शीतलता प्रदान करने वाला और औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। माँ शीतला की कृपा से घर-परिवार में सुख-शांति और आरोग्य का वास होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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