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शीतला अष्टमी 2026: एक साथ शीतला अष्टमी, कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का पावन संयोग

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Sheetala Ashtami: चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, जिसे शीतला अष्टमी के नाम से जाना जाता है, इस वर्ष 11 मार्च 2026 को एक अत्यंत दुर्लभ और पावन संयोग लेकर आ रही है, जब एक ही दिन शीतला अष्टमी के साथ कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का महासंयोग बन रहा है, जो भक्तों के लिए असीम पुण्य और देवताओं के विशेष आशीर्वाद का द्वार खोलेगा।

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शीतला अष्टमी 2026: एक साथ शीतला अष्टमी, कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का पावन संयोग

इस पावन दिवस पर तीन शक्तिशाली देवताओं की एक साथ पूजा-अर्चना करने का अवसर मिल रहा है, जिससे स्वास्थ्य, सुरक्षा, सुख-समृद्धि और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। यह अद्भुत त्रिवेणी संयोग भक्तों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगा और समस्त बाधाओं को दूर करेगा। इस विशेष दिन का ज्योतिषीय महत्व भी अत्यधिक है, जहां ग्रहों की स्थिति इन तीनों पर्वों के शुभ प्रभावों को और बढ़ा देती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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शीतला अष्टमी पर त्रिदेवी पूजन का महत्व

शीतला अष्टमी का विशेष महत्व

शीतला अष्टमी देवी शीतला को समर्पित है, जिन्हें रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। इस दिन बासी भोजन ग्रहण करने और देवी को बासी भोजन का भोग लगाने की परंपरा है, जिसे बासोड़ा भी कहा जाता है। मान्यता है कि इससे घर में शीतलता बनी रहती है और चर्म रोगों से मुक्ति मिलती है। माता शीतला का पूजन करने से व्यक्ति को निरोगी काया प्राप्त होती है और परिवार में सुख-शांति का वास होता है।

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कालाष्टमी: भय और बाधाओं का निवारण

कालाष्टमी भगवान शिव के रौद्र रूप, काल भैरव को समर्पित है। इस दिन काल भैरव की पूजा करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है। भगवान काल भैरव तंत्र-मंत्र और बुरी नज़र से रक्षा करते हैं। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो किसी अज्ञात भय या बाधाओं से पीड़ित हैं।

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी: सुख-समृद्धि का आगमन

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव है, जो हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा करने से संतान सुख, धन-धान्य और पारिवारिक सुख-शांति प्राप्त होती है। यह व्रत मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में आनंद लाने वाला माना जाता है। इस विशेष दिन पर भगवान कृष्ण का अभिषेक करने से सभी कष्ट दूर होते हैं।

पुजा विधि

इस दुर्लभ संयोग के दिन तीनों देवताओं का पूजन विधि-विधान से करना चाहिए।

  • सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • सर्वप्रथम माता शीतला की पूजा करें। उन्हें बासी भोजन (दही, पुआ, पूड़ी आदि), जल, रोली, चावल, वस्त्र और पुष्प अर्पित करें।
  • इसके बाद भगवान काल भैरव का पूजन करें। उन्हें तिल, सरसों का तेल, उड़द दाल से बनी वस्तुएं, धूप, दीप और पुष्प चढ़ाएं।
  • अंत में भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करें। उन्हें पंचामृत से स्नान कराकर वस्त्र, चंदन, तुलसीदल, माखन-मिश्री और मोरपंख अर्पित करें।
  • तीनों देवताओं के समक्ष अपनी मनोकामनाएं कहें और आरती करें।
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निष्कर्ष और उपाय

यह 11 मार्च 2026 का दिन एक अद्वितीय आध्यात्मिक अवसर प्रदान कर रहा है, जब तीन प्रमुख पर्व एक साथ आ रहे हैं। इस दिन सच्ची श्रद्धा और भक्ति से पूजा करने से व्यक्ति को त्रिदेवी और भगवान कृष्ण का संयुक्त आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन के सभी क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। यह दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रदान करता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन दान-पुण्य और ब्राह्मणों को भोजन कराना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

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