
Samrat Choudhary: बिहार की राजनीति में इन दिनों हर दिन कुछ नया देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सीतामढ़ी के पवित्र पुनौरा धाम पहुंचे, जहां उन्होंने माता जानकी मंदिर में पूजा-अर्चना की और 2028 तक भव्य मंदिर निर्माण का बड़ा ऐलान किया। उनकी इस यात्रा से न केवल धार्मिक माहौल गरमाया, बल्कि सियासी गलियारों में भी नई चर्चाएं शुरू हो गईं।शनिवार को सीतामढ़ी के पुनौरा धाम पहुंचे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने माता जानकी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद वे सीताकुंड गए, जहां जल चढ़ाकर आरती की। धार्मिक माहौल के बीच मुख्यमंत्री की मौजूदगी से पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल देखा गया। मुख्यमंत्री ने जानकी नवमी के अवसर पर सीतामढ़ी महोत्सव का उद्घाटन भी किया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग मौजूद रहे। लोगों को संबोधित करते हुए सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि उनके लिए यह गौरव का विषय है कि मां सीता के आशीर्वाद से बिहार के मुख्यमंत्री के पद पर बैठकर मां का आशीर्वाद लेने आए हैं। उन्होंने कहा, “यहां की धरती में मां का जुड़ाव दिखता है।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
मां सीता के जन्म से जुड़ी अनोखी मान्यता
मुख्यमंत्री ने मां सीता के जन्म से जुड़ी एक पुरानी मान्यता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब भूमिपूजन करने आए थे, उस दिन बारिश हुई थी। उन्होंने इसे एक प्रतीक बताया। सीएम ने कहा, “मां सीता के जन्म के समय भी हजारों साल पहले यहां अकाल पड़ा था। उसी अकाल में मां का जन्म हुआ था। अब भूमिपूजन में बारिश हुई, दोनों का कनेक्शन है।”
2028 तक भव्य जानकी मंदिर निर्माण का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने पुनौरा धाम में बनने वाले भव्य जानकी मंदिर को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि अफसरों ने जून 2029 तक मंदिर तैयार होने की बात कही थी, लेकिन उन्होंने सख्त निर्देश दिए हैं कि 31 दिसंबर 2028 तक मां सीता के मंदिर का काम पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि नीतीश कुमार ने सीतामढ़ी में सीतापुरम बनाने की बात कही थी, और उन्होंने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही यह फैसला लिया है। मां जानकी से जुड़े जितने भी स्थान हैं, उन्हें एक साथ जोड़ा जाएगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
- यह भव्य मंदिर पुनौरा धाम में लगभग 50 एकड़ क्षेत्र में 882 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा।
- मंदिर का निर्माण राजस्थान से लाए जा रहे खास सैंडस्टोन (बलुआ पत्थर) से होगा।
- इसकी ऊंचाई 156 फीट होगी।
- इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
- मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी अयोध्या के राम मंदिर के वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा और उनके परिवार को दी गई है।
- पुनौरा धाम को रामायण सर्किट के प्रमुख स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे धार्मिक पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
पर्यटन और सियासी मुलाकातें
सीतामढ़ी दौरे से पहले मुख्यमंत्री ने सचिवालय में अधिकारियों के साथ ईको-टूरिज्म को लेकर एक समीक्षा बैठक की थी। इस दौरान उन्होंने पर्यटन क्षेत्र को तेजी से विकसित करने के निर्देश दिए। सरकार का फोकस धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने पर है।इसके अलावा, दौरे से ठीक पहले मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई। दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई, जिसमें केंद्रीय मंत्री ललन सिंह भी मौजूद थे। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर जारी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। पढ़िए विस्तार से
Samrat Choudhary: बिहार के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शनिवार को जानकी नवमी के अवसर पर सीतामढ़ी पहुंचे। यहां उन्होंने पुनौराधाम स्थित माता जानकी मंदिर में पूजा-अर्चना की और इसके निर्माण कार्य की प्रगति पर अहम जानकारियां साझा कीं। उनके आगमन से सीतामढ़ी में धार्मिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई।
उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का काफिला सीधे पुनौराधाम पहुंचा, जहां उन्होंने माता जानकी के मंदिर में विधिवत पूजा की। इसके बाद वे सीताकुंड भी गए, जहां जल अर्पित कर आरती की गई। इस दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जो सुबह से ही उनकी एक झलक पाने के लिए जुटे थे। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे और पूरा माहौल भक्तिमय बना हुआ था। इसी दौरान सीतामढ़ी महोत्सव का भी उद्घाटन किया गया।
सीतामढ़ी महोत्सव का उद्घाटन और Samrat Choudhary का संबोधन
मंच से जनसभा को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने कहा कि वे मां सीता के आशीर्वाद से ही इस पवित्र भूमि पर आए हैं। उन्होंने इस भूमि को पूजनीय बताते हुए एक पुरानी घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब भूमिपूजन हुआ था तब बारिश हुई थी, जिसे उन्होंने एक शुभ संकेत माना। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मान्यताओं के अनुसार माता सीता के जन्म के समय भी अकाल पड़ा था। उन्होंने इस भूमि के महत्व पर जोर देते हुए इसके चहुंमुखी विकास का संकल्प दोहराया।
मुख्यमंत्री ने माता जानकी मंदिर के निर्माण को लेकर एक स्पष्ट समय सीमा भी तय की। उन्होंने बताया कि अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की गई है। शुरुआत में जून 2029 तक काम पूरा होने की बात सामने आई थी, लेकिन अब इस लक्ष्य को संशोधित कर दिया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। उन्होंने निर्देश दिया कि 31 दिसंबर 2028 तक हर हाल में मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हो जाना चाहिए। यह एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जो सीतामढ़ी को एक नई पहचान देगी।
भव्य मंदिर का स्वरूप और निर्माण कार्य
इस परियोजना की लागत और भव्य स्वरूप भी सामने आया है। लगभग 50 एकड़ भूमि पर यह विशाल मंदिर बनेगा। इसके निर्माण पर करीब 882 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। मंदिर की ऊंचाई 156 फीट तय की गई है और इसके लिए खास बलुआ पत्थर राजस्थान से मंगाया जा रहा है, जो इसे अद्वितीय सुंदरता प्रदान करेगा। उप मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि इस क्षेत्र के अन्य धार्मिक स्थलों को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा, जिससे यह पूरा इलाका एक बड़ा तीर्थस्थल बन सके। उन्होंने बताया कि यहां एक मेडिकल कॉलेज बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है, जिसका नाम भी माता सीता से ही जुड़ा होगा।
राजधानी पटना में बैठकों का दौर और राजनीतिक मुलाकातें
अपने सीतामढ़ी दौरे से पहले, उप मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने पटना में कई महत्वपूर्ण बैठकें की थीं। इनमें इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने पर विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि धार्मिक स्थलों को पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। इसी दौरे से पहले, उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मुलाकात की, जो लगभग 20 मिनट तक चली। इस बैठक में वरिष्ठ नेता राजीव रंजन सिंह भी मौजूद रहे। इस मुलाकात के बाद से राज्य की राजनीति में कयासों का बाजार गर्म हो गया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
पुनौरा धाम को ‘रामायण सर्किट’ से भी जोड़ा जा रहा है, जिससे देशभर के श्रद्धालुओं के लिए यहां तक पहुंचना और भी आसान हो जाएगा। मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी प्रसिद्ध चंद्रकांत सोमपुरा और उनके परिवार को दी गई है, जिन्होंने कई बड़े मंदिरों का डिजाइन तैयार किया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस परियोजना के पूरा होने के बाद यहां श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि होने की उम्मीद है। जानकी नवमी के अवसर पर यह भव्य आयोजन पूरे दिन चलता रहा और प्रशासन भी व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर मुस्तैद रहा।







