
बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र का आज खत्म हो गया। शराब, शराबबंदी, जदयू का गिरफ्तार आदमी, इस्तीफा, राजद को सीएम पद दो समेत मुख्यमंत्री इस्तीफा दो के बीच अंतिम दिन कुल पांच बैठकें हुई। मगर सबसे अहम यह रहा कि आज सदन ने वंदे मातरम् नहीं कहा। पहले की राष्ट्रगीत वंंदे मातरम् गाने की प्रथा को आज खत्म कर दिया गया। पढ़िए पूरी खबर
बीते कुछ दिन पहले ही मेरठ, मुरादाबाद, वाराणसी और गोरखपुर के नगर निगमों की बैठक में पार्षदों ने वंदे मातरम् गाने से इनकार कर दिया था। कांग्रेस, एसपी और बीएसपी के सदस्यों ने इस गीत पर अपना विरोध दर्ज कराया था। 2006 में राष्ट्रीय गीत के शताब्दी समारोह से पहले दारुल उलूम ने वंदे मातरम् को “इस्लामिक विरोधी” बताते हुए एक फतवा जारी किया था। मगर आज बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के समापन पर क्या हुआ…
जानकारी के अनुसार,अनिश्चितकाल तक स्थगित किये जाने से पहले स्पीकर अवध बिहारी चौधरी ने वंदे मातरम् को सदन में नहीं गंवाया गया। इस तरह से सदन के अंदर 2020 में जो व्यवस्था शुरू की गई थी उसे खत्म कर दिया गया। नई सरकार बनने के बाद विजय सिन्हा की गई पहल को नये स्पीकर ने खत्म कर दिया है। इसी कड़ी में वंदे मातरम से भी महागठबंधन की सरकार ने किनारा कर लिया है।
शीतकालीन सत्र के दौरान जहरीली शराब के मुद्दे पर सदन में भारी हंगामा हुआ। विपक्ष के हंगामे के बीच कई दफे सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। 2020 चुनाव में एनडीए के सत्ता में आने और स्पीकर की कुर्सी भाजपा के विजय कुमार सिन्हा को मिलने के बाद सदन में राष्ट्रगीत से समापन की प्रथा की शुरूआत की गई थी।
अब महागठबंधन की सरकार है। नई सरकार बनने के बाद विजय सिन्हा की कई पहल को नये स्पीकर ने खत्म कर दिया है. इसी कड़ी में वंदे मातरम से भी महागठबंधन की सरकार ने किनारा कर लिया है।
नीतीश कुमार तब भी मुख्यमंत्री थे और अब भी, लेकिन अध्यक्ष की कुर्सी अब राजद के पास है। लिहाजा सदन के अनिश्चितकालीन स्थगित किये जाने से पहले राष्ट्रगीत वंंदे मातरम् गाने की प्रथा को खत्म कर दिया गया। शीतकालीन सत्र के समापन से पहले विस स्पीकर अवध बिहारी चौधरी ने सदन में सरकारी कामों का बखान किया। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष को धन्यवाद देते हुए और नये साल की अग्रिम बधाई देकर सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।







