आठवें दशक की शुरुआत में हिन्दी फिल्मों के दर्शकों के लिए नए सितारों से सजी एक फिल्म आई। नाम था एक दूजे के लिए। यह फिल्म एक तमिल युवा, वासु (कमल हासन) और एक उत्तर भारतीय लड़की, सपना (रति अग्निहोत्री) के बीच प्रेम पर आधारित है। दोनों बिल्कुल अलग पृष्ठभूमि से आते हैं और एक-दूसरे की भाषा भी मुश्किल से समझ, बोल पाते हैं।
जब वासु और सपना अपने प्यार का इज़हार करते हैं, तो उनके घरों में कोहराम मच जाता है। यह फिल्म दुखांत प्रेम कहानी थी, जिसने उस दौर के युवाओं को खूब प्रभावित किया। सपना की भूमिका को जीने वाली रति अग्निहोत्री की यह पहली हिंदी फिल्म थी, और इससे वे दर्शकों के दिल में उतर गईं।






रति अग्निहोत्री का जन्म 10 दिसंबर 1960 को उत्तर प्रदेश के बरेली में एक रूढ़िवादी पंजाबी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। (अभिनेता अतुल अग्निहोत्री रति के चचेरे भाई हैं, जो सलमान खान के बहनोई भी हैं) परिवार में अभिनय की अनुमति नहीं थी, इसलिए रति को करियर के शुरुआती दौर में काफी संघर्ष करना पड़ा।
मनोरंजन की चकाचौंध भरी दुनिया में जहां कई लोग मौका तलाशते रह जाते हैं, वहीं रति अग्निहोत्री ने कम उम्र में ही बड़ी सफलता हासिल की और छोटे शहर की लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गईं।
उन्होंने 10 साल की उम्र में मॉडलिंग शुरू कर दी थी। 16 वर्ष की उम्र में चेन्नई शिफ्ट होना उनके करियर का टर्निंग पॉइंट बना। स्कूल प्ले में अभिनय करते देखकर मशहूर डायरेक्टर भारती राजा ने उन्हें फिल्म में मौका दिया।
रति ने अपनी पहली फिल्म ‘पुदिया वरपुकल’ (1979) में काम किया, जो सुपरहिट रही। भाग्यराजा ने उन्हें तमिल भाषा सिखाई और रति रातोंरात स्टार बन गईं। उन्होंने हिंदी डेब्यू से पहले दक्षिण की भाषाओं में 30 से अधिक फिल्में कर ली थीं और रजनीकांत, कमल हासन, चिरंजीवी, नागेश्वर राव जैसे बड़े सितारों के साथ काम किया।
एक दूजे के लिए (1981) साउथ फ़िल्म मारो चरित्र की रीमेक थी। निर्देशक के मन में संशय था कि रति इसे कर पाएंगी या नहीं, लेकिन रति ने अपने अभिनय से सभी को प्रभावित किया। इस फिल्म के बाद कमल हासन को भी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पहचान मिली और रति को बड़े पैमाने पर हिंदी फिल्मों में काम मिला।
उन्होंने करीब 50 हिंदी फिल्मों में अभिनय किया। उनकी शौकीन, स्वामी दादा, कुली, रिश्ता कागज का, मजदूर, तवायफ, हुकूमत, ज़लज़ला जैसी फिल्में काफी चर्चित रहीं।
9 फरवरी 1985 को रति ने आर्किटेक्ट अनिल वीरवानी से शादी की और फिल्मों से दूरी बना ली। लेकिन शादी के बाद उनका जीवन सुखद नहीं रहा। उन्होंने पति पर प्रताड़ना के आरोप लगाए और अलग हो गईं।
2001 में उन्होंने फिल्मों में वापसी की और काजोल की मां का किरदार ‘कुछ खट्टी कुछ मीठी’ में निभाया। इसके बाद उन्होंने हम तुम, क्यों हो गया ना, देव, सोचा न था जैसी फिल्मों में काम किया। टीवी और नाटकों में भी सक्रिय रहीं।
रति के बेटे तनुज वीरवानी भी अभिनेता हैं। रति आज भी अच्छे प्रोजेक्ट्स में काम करती हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म तवायफ में वेश्या का किरदार उनके करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण रोल था। उन्हें बॉडी लैंग्वेज से लेकर हावभाव तक सीखना पड़ा, जो उनकी पर्सनैलिटी से बिल्कुल अलग था। वे इस किरदार को आज भी सबसे कठिन मानती हैं।
अब रति मां के किरदार आसानी से निभाती हैं, क्योंकि वह खुद एक मां हैं और इन किरदारों से भावनात्मक रूप से जुड़ पाती हैं।








