Bihar DPO Corruption: बिहार के सारण जिले में एक चौंकाने वाला भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा, योजना एवं लेखा) अजीत कुमार हरिजन के पास उनकी आय से लगभग दस गुना अधिक संपत्ति पाई गई है। उप विकास आयुक्त (DDC) के नेतृत्व में गठित पांच सदस्यीय जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में इस बड़े खुलासे की पुष्टि की है। यह रिपोर्ट सारण जिलाधिकारी को सौंप दी गई है, जिसके बाद अब विभागीय और कानूनी कार्रवाई की तैयारी हो रही है।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि अजीत कुमार हरिजन और उनकी पत्नी के बैंक खातों में 32 महीनों के भीतर 2.5 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हुई, जबकि इस अवधि में उनका कुल वेतन मात्र 27.5 लाख रुपये था। इसी बीच, डीपीओ ने एकमा प्रखंड में लगभग 41.50 लाख रुपये की लागत से 120 कट्ठा जमीन भी खरीदी और लाखों रुपये खर्च कर एक मकान भी बनवाया।






वेतन 27 लाख, खाते में 2.5 करोड़: कैसे हुआ Bihar DPO Corruption का पर्दाफाश?
जांच रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2023 से अप्रैल 2026 तक 32 माह की अवधि में अजीत कुमार हरिजन का कुल वेतन 27 लाख 43 हजार 040 रुपये था। इसके विपरीत, उनके और उनकी पत्नी पूजा कुमारी के खातों में कुल 2 करोड़ 51 लाख 6 हजार 562 रुपये जमा हुए। यह साफ तौर पर आय से अधिक संपत्ति का मामला है। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि डीपीओ के परिवार के अन्य सदस्यों के खातों की गहन जांच की जाए, तो कई और बड़े मामले सामने आ सकते हैं।
जांच टीम में उप विकास आयुक्त, वरीय कोषागार पदाधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय और कार्यपालक अभियंता एलएईओ-1 शामिल थे। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अजीत कुमार हरिजन को इस बात की जानकारी थी कि शिकायतकर्ता रवि कुमार राम शिक्षा विभाग में संवेदक के रूप में काम करते हैं, फिर भी उनके और उनके रिश्तेदारों के बीच पैसों का लेन-देन हुआ। यह बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली का सीधा उल्लंघन है।
कोई सरकारी कर्मचारी, सरकार या तय सक्षम प्राधिकार की पहले से स्वीकृति या अनुमति के बिना अपने परिवार के किसी सदस्य या अपनी तरफ से काम करने वाले किसी दूसरे व्यक्त्ति से न तो कोई गिफ्ट स्वीकार करेगा और न ही स्वीकार करने देगा।
डीपीओ की पत्नी के नाम पर खरीदी गई 120 कट्ठा जमीन
जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि अजीत कुमार हरिजन ने अपनी पत्नी पूजा कुमारी के नाम पर 41 लाख 50 हजार रुपये में छह बीघा नौ कठ्ठा आठ धूर जमीन खरीदी है। इतनी कम सेवा अवधि में इतनी बड़ी मात्रा में जमीन की खरीद और बैंक खातों में जमा राशि उनकी ज्ञात आय से कहीं अधिक है। अधिकारियों ने इस मामले में डीपीओ, उनकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम से संचालित सभी बैंक खातों की जांच करने के साथ-साथ उनके नाम पर खरीदी गई भूमि की भी अवर निबंधन पदाधिकारी, सारण से जांच कराने की सिफारिश की है।
ऐसे सामने आया था रिश्वत और संपत्ति का मामला
यह पूरा मामला अप्रैल 2026 में सामने आया, जब जिला लोक शिकायत कोषांग में कर्णपुरा, एकमा के रवि कुमार राम ने शिकायत दर्ज कराई। रवि कुमार राम ने बताया कि डीपीओ अजीत कुमार हरिजन ने उन्हें बड़े पैमाने पर काम दिलाने का लालच देकर 12.5 लाख रुपये की मांग की थी। रवि ने तीन किस्तों में 10.70 लाख रुपये नकद और 1 लाख 3 हजार 480 रुपये डीपीओ के परिवार के सदस्यों व रिश्तेदारों के मोबाइल नंबर पर डिजिटल माध्यम से भेज दिए थे।
रवि कुमार राम के अनुसार, पैसे मिलने के बाद डीपीओ काम देने में आनाकानी करने लगे। कई बार काम मांगने पर उन्हें धमकी दी गई कि उन्हें सारण सहित अन्य जिलों से ब्लैकलिस्टेड कर दिया जाएगा और उन्हें कहीं काम नहीं करने दिया जाएगा। इसके बाद रवि ने अपने और अपने चचेरे भाई के मोबाइल से 1 लाख 53 हजार 800 रुपये और डिजिटली भुगतान किए थे।
लोक शिकायत निवारण कोषांग ने अपने फैसले में पाया कि अजीत कुमार हरिजन ने बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली का उल्लंघन किया है। कोषांग ने यह भी कहा कि परिवादी रवि कुमार राम ने भी लोक सेवक को प्रभावित करने के लिए रिश्वत दी है, इसलिए वे भी दोषी हैं और उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, अजीत कुमार हरिजन ने इन आरोपों को बकाया भुगतान विवाद और न्यायालय में चल रहे मामले के दबाव का नतीजा बताया था।
| प्राप्तकर्ता | राशि (रु.) | दिनांक |
|---|---|---|
| पूजा कुमारी (पत्नी) | 30,000 | 26 मार्च 2024 |
| गुड्डू हरिजन (भाई) | 800 | 22 जून 2024 |
| रविकांत राम (साला) | 5,000 और 100 | 12, 26 मई 2024 |
| काजल कुमारी (भतीजी) | लगभग 2,00,000 (25+ ट्रांजैक्शन) | विभिन्न तिथियाँ |
| योगेन्द्र मांझी (तत्कालीन ड्राइवर) | 10,000 से अधिक (3 ट्रांजैक्शन) | विभिन्न तिथियाँ |
यह तालिका स्पष्ट रूप से दिखाती है कि शिकायतकर्ता द्वारा डीपीओ के परिवार और करीबियों को कितनी बड़ी रकम भेजी गई थी, जो भ्रष्टाचार के आरोपों को बल देती है।
आगे की कार्रवाई
सारण जिलाधिकारी अब इस जांच रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई करने में जुट गए हैं। इसकी रिपोर्ट राज्य मुख्यालय को भी भेजी जा रही है, ताकि अजीत कुमार हरिजन के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सके। इस मामले में डीपीओ के पूरे परिवार और रिश्तेदारों के बैंक खातों की जांच होने पर कई और राज खुलने की संभावना है।








