Stock Market: भारतीय शेयर बाजार लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ, जहाँ तेल एवं गैस तथा सूचना प्रौद्योगिकी के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी और साल के अंत में छुट्टियों के कमजोर कारोबारी माहौल ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिदृश्य में कोई मजबूत उत्प्रेरक न होने के कारण बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है।
बाजार में भूचाल: Stock Market में बिकवाली का दौर जारी, सेंसेक्स 84,695 पर
सोमवार को बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 345.91 अंक यानी 0.41 प्रतिशत टूटकर 84,695.54 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 403.59 अंक गिरकर 84,637.86 अंक तक फिसल गया था। वहीं, एनएसई का निफ्टी 50 लगातार तीसरे दिन दबाव में रहा और 100.20 अंक यानी 0.38 प्रतिशत गिरकर एक बार फिर 26,000 के अहम स्तर से नीचे 25,942.10 अंक पर बंद हुआ। यह गिरावट उन निवेशकों के लिए चिंता का विषय है जो नए साल में बाजार से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे थे।
Stock Market में प्रमुख गिरावटें और उनके कारण
सेंसेक्स की कंपनियों में अडानी पोर्ट्स के शेयरों में सबसे अधिक 2.22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, एचसीएल टेक, पावर ग्रिड, ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और भारती एयरटेल के शेयरों में भी 1 से 2 प्रतिशत के बीच कमजोरी देखी गई। बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर भी 0.88 प्रतिशत फिसले। केजी-डी6 गैस विवाद में रिलायंस और उसकी साझेदार बीपी से सरकार द्वारा 300 अरब डॉलर के मुआवजे की मांग से जुड़ी खबरों ने भी शेयर पर दबाव बनाया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसका असर व्यापक बाजार पर भी देखने को मिला।
हालांकि, कुछ शेयरों ने इस गिरावट के माहौल में भी मजबूती दिखाई। टाटा स्टील के शेयरों में 1.83 प्रतिशत की मजबूती देखने को मिली, जबकि एशियन पेंट्स, हिंदुस्तान यूनिलीवर और इटर्नल के शेयर भी बढ़त के साथ बंद हुए। व्यापक बाजार में, बीएसई स्मॉलकैप सूचकांक 0.58 प्रतिशत और मिडकैप सूचकांक 0.45 प्रतिशत गिरकर बंद हुए, जो बताता है कि दबाव केवल बड़े शेयरों तक ही सीमित नहीं था।
बाजार विशेषज्ञों की राय और वैश्विक परिदृश्य
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार में तेजी के लिए कोई मजबूत उत्प्रेरक नजर नहीं आ रहा है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि अधिकतर निवेशक छुट्टियों के मूड में हैं, जिससे निकट अवधि में बाजार के सीमित दायरे में रहने की संभावना है। वहीं रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजीत मिश्रा ने कहा कि वैश्विक संकेतों और चुनिंदा शेयरों से जुड़ी खबरों के कारण निवेशक व्यापक दांव लगाने के बजाय आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। चयनात्मक निवेश को तरजीह दे रहे हैं। यह स्थिति उन छोटे निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है जो अस्थिरता के बीच सही निर्णय लेने में संघर्ष कर रहे हैं। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कॉस्पी सूचकांक दो प्रतिशत से अधिक चढ़ा, चीन का शंघाई कंपोजिट मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हैंगसेंग नुकसान में रहे। यूरोपीय बाजारों में भी दोपहर के कारोबार में कमजोरी का रुख था, जबकि अमेरिकी बाजार शुक्रवार को लगभग स्थिर बंद हुए थे। यह वैश्विक अनिश्चितता भारतीय Stock Market के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ाती है।
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को शुद्ध रूप से 317.56 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 1,772.56 करोड़ रुपये की खरीदारी की। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी भारतीय बाजारों पर दबाव बनाए हुए है। इस बीच, वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1.70 प्रतिशत चढ़कर 61.67 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जो ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है। पिछले सप्ताह भी सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिससे पता चलता है कि यह गिरावट सिर्फ एक दिन की नहीं बल्कि एक प्रवृत्ति का हिस्सा है।







