Nepal Flood: नेपाल के रसुवा जिले में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 8 लोगों की जान चली गई है, जबकि 41 से अधिक सुरक्षाकर्मी लापता बताए जा रहे हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है, क्योंकि बाढ़ का प्रकोप इतना जबरदस्त है कि पूरा तिमुरे गांव ही पानी और मलबे में समा गया है। तिब्बत की ओर से नेपाल में प्रवेश करने वाली भोटे कोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से कई तटीय बाजार और जलविद्युत परियोजनाएं जलमग्न होकर क्षतिग्रस्त हो गई हैं।
अचानक आई आपदा ने मचाई भारी तबाही
बाढ़ के कारण रसुवा जिले में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। नदी किनारे बसे कई बाजार पूरी तरह से पानी में डूब गए हैं। इसके साथ ही, कई महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे बिजली आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए त्रिशूली नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी जारी की है। इस Nepal Flood ने व्यापक विनाश किया है।
रसुवा के प्रमुख जिला अधिकारी नरेंद्र परियार ने काठमांडू पोस्ट को बताया, ‘बाढ़ का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है। जिला मुख्यालय और आसपास के इलाकों में बिल्कुल बारिश नहीं हुई है और मौसम साफ है।’
बाढ़ का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, जिससे स्थानीय लोगों और प्रशासन में चिंता बनी हुई है। मौसम साफ होने के बावजूद नदी में अचानक इतना पानी आने से यह आशंका जताई जा रही है कि ऊपरी पर्वतीय क्षेत्रों में कोई ग्लेशियर झील फटने या किसी अस्थायी बांध के टूटने से यह भयानक स्थिति उत्पन्न हुई है। प्रशासन लापता लोगों से संपर्क स्थापित करने की लगातार कोशिश कर रहा है। शुरुआती रिपोर्टों में बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की बात सामने आई है।
हेलीकॉप्टर भी नहीं उतर पाया, पूरा तिमुरे गांव जलमग्न
स्थानीय निवासी अजय श्रेष्ठ ने बताया कि पानी का बहाव इतना तेज था कि ऐसा लग रहा था मानो अचानक कोई बड़ा बांध टूट गया हो। इस बाढ़ में चिलिमे हाइड्रोपावर
प्रोजेक्ट सहित कई अन्य जलविद्युत परियोजनाओं को गंभीर क्षति पहुंची है। नदी का प्रचंड बहाव नुवाकोट और धाडिंग जैसे पड़ोसी जिलों के निचले इलाकों के लिए भी खतरा बना हुआ है।
तिमुरे में फंसे लोगों को बचाने के लिए भेजा गया एल्टीट्यूड एयर का एक हेलीकॉप्टर बिना लैंड किए ही वापस काठमांडू लौट आया। पायलट ने बताया, ‘बाढ़ के तेज बहाव में तिमुरे का स्थानीय हेलीपैड पूरी तरह बह गया है, जिससे वहां उतरने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं बची। आसमान से देखने पर पूरा तिमुरे गांव बाढ़ और मलबे के कारण लगभग दिखाई ही नहीं दे रहा था।’
यह स्थिति बचाव कार्यों को और भी चुनौतीपूर्ण बना रही है। पूरा तिमुरे गांव बाढ़ और मलबे की वजह से पहचान में नहीं आ रहा है, जिससे लापता लोगों का पता लगाना बेहद मुश्किल हो गया है। प्रशासन और बचाव दल लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और राहत कार्यों के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
28 पुलिसकर्मी लापता, काठमांडू-चितवन पृथ्वी राजमार्ग को पूरी तरह बंद
रसुवा में बुधवार सुबह तिब्बत से आए पानी के सैलाब से हाहाकार मच गया है। इस जल आपदा में रसुवा जिले में 19 पुलिसकर्मी लापता हो गए हैं।
बागमती प्रदेश के पुलिस प्रमुख डीआईजी दीपक रेग्मी के अनुसार, रसुवागढ़ी पुलिस चौकी में तैनात 22 पुलिस कर्मियों में से केवल 9 से ही संपर्क हो पाया है। 13 पुलिसकर्मी से संपर्क नहीं हो पा रहा। स्याफ्रुबेसी में तैनात 9 पुलिसकर्मियों में से केवल 3 से संपर्क हो पाया है। पुलिसकर्मी लापता हैं। बाढ़ में पुलिस कार्यालय भी बह गया है। टिमुरे बीओपी में तैनात 9 सशस्त्र पुलिसकर्मी भी लापता बताए गए हैं।
धादिड़ जिले के राजमार्ग क्षेत्र भी बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। अनहोनी की आशंका को देखते हुए दोनों दिशाओं से वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। उन्होंने बताया कि बाढ़ ने दर्जनों बस्तियों और बाजारों को प्रभावित किया है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए काठमांडू से आपदा प्रबंधन पुलिस की टीम भी प्रभावित क्षेत्र की ओर रवाना हो गई है।








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