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मार्च, 4, 2026
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षटतिला एकादशी 2026: तिल के छह चमत्कारी उपयोग और महत्व

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Shattila Ekadashi 2026: माघ मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली षटतिला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है, जो मोक्ष और पुण्य फल प्रदान करने वाला माना जाता है। Shattila Ekadashi 2026 पर तिल का विशेष महत्व होता है और इसके बिना यह व्रत अधूरा ही रहता है।

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षटतिला एकादशी 2026: तिल के छह चमत्कारी उपयोग और महत्व

षटतिला एकादशी 2026 पर तिल के उपयोग का आध्यात्मिक महत्व

माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना करने और तिल का प्रयोग करने से समस्त पापों का नाश होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शास्त्रों में इस एकादशी पर तिल के छह प्रकार के उपयोग बताए गए हैं, जिन्हें करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और व्यक्ति को बैकुंठ धाम में स्थान मिलता है।

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षटतिला एकादशी की पूजा विधि

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें।
  • घर के मंदिर को गंगाजल से शुद्ध करें और भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।
  • भगवान विष्णु को पीला चंदन, पीले पुष्प, अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • पूजा में विशेष रूप से तिल का प्रयोग करें। भगवान को तिल से बने मिष्ठान या तिल अर्पित करें।
  • एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और आरती करें।
  • दिनभर फलाहार व्रत रखें।
  • शाम को पुनः भगवान विष्णु की आरती कर व्रत का पारण करें।
  • दूसरे दिन ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा और तिल का दान करें।
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षटतिला एकादशी का महत्व और तिल के छह उपयोग

यह एकादशी विशेष रूप से तिल के उपयोग के लिए जानी जाती है, जिसके बिना यह व्रत अपूर्ण माना जाता है। तिल का प्रयोग स्नान में, शरीर पर उबटन लगाने में, हवन में, पितरों के तर्पण में, भोजन में और दान में किया जाता है। इन छह प्रकार के प्रयोगों के कारण ही इसे षटतिला एकादशी कहा जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मान्यता है कि इस दिन जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करता है और तिल का प्रयोग इन छह विधियों से करता है, उसे मृत्यु के उपरांत विष्णु लोक में स्थान प्राप्त होता है और उसे आवागमन के चक्र से मोक्ष मिलता है। यह दिन पितरों को भी शांति प्रदान करने वाला माना गया है, क्योंकि तिल के दान और तर्पण से उन्हें मुक्ति मिलती है।

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भगवान विष्णु का मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

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षटतिला एकादशी का व्रत समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला और पापों का नाश करने वाला है। इस दिन श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु की उपासना करने से व्यक्ति को आरोग्य, धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है। व्रत के नियमों का पालन करते हुए तिल का विधिपूर्वक उपयोग करना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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