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Women’s Reservation Bill: महिला आरक्षण बिल पर लालू यादव ने की वंचितों के लिए 15% कोटे की मांग, पुराना वीडियो, नई बहस

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Women’s Reservation Bill: देश की राजनीति में महिला आरक्षण का मुद्दा हमेशा गरमाया रहता है। अब राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया लालू प्रसाद यादव ने इसमें एक नई बहस छेड़ दी है, जिसमें उन्होंने दलित, पिछड़ी और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए अलग से कोटे की मांग की है।

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राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने एक बार फिर महिला आरक्षण के मुद्दे पर अपना पुराना स्टैंड दोहराया है। उन्होंने मांग की है कि महिला आरक्षण के भीतर एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं के लिए कम से कम 15 प्रतिशत अलग से आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि अगर वंचित तबके को यह भागीदारी मिलती है, तो उन्हें इस विधेयक से कोई ऐतराज नहीं है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

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महिला आरक्षण बिल में ‘वंचितों का हक’: लालू की पुरानी मांग

लालू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक बयान जारी करते हुए अपना एक पुराना वीडियो भी साझा किया। इस वीडियो में वे सदन में दलित, पिछड़ी और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए 15 प्रतिशत आरक्षण का मुद्दा उठाते दिख रहे हैं। उन्होंने लिखा कि दशकों से सड़क से लेकर संसद तक उनकी यही मांग रही है कि महिला आरक्षण बिल पारित तो हो, लेकिन इसमें वंचित तबके के लिए अलग से आरक्षण का प्रावधान हो। अपने संसदीय भाषण का जिक्र करते हुए लालू प्रसाद ने गरीब महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की संस्कृति को आगे बढ़ाने वाली महिलाओं के वे पक्षधर हैं, लेकिन वर्तमान में वंचित तबके की महिलाओं को समुचित भागीदारी नहीं मिल रही है।

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तेजस्वी ने भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप

इस मुद्दे पर लालू के बेटे और राजद नेता तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर तीखे आरोप लगाए हैं। तेजस्वी ने कहा कि भाजपा सरकार ने चालाकी से महिला आरक्षण विधेयक में ‘परिसीमन’ का प्रस्ताव जोड़ दिया। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में जब यह विधेयक सदन से पारित हुआ था, तब मोदी सरकार ने कहा था कि इसे नई जातिगत जनगणना और उसके बाद होने वाले बदलावों के बाद 2034 से लागू किया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। तेजस्वी का आरोप है कि तीन साल तक इस विधेयक को अधिसूचित तक नहीं किया गया। उनका मानना है कि भाजपा महिला आरक्षण विधेयक की आड़ में परिसीमन, संविधान बदलने, लोकतंत्र खत्म करने और संघीय ढांचे को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। उनका दावा है कि इसके पीछे आरएसएस का अपना एजेंडा लागू करना है।

क्या कहता है विधेयक और क्यों नहीं हुआ पास?

प्रस्तावित 131वां संविधान संशोधन विधेयक, जो महिला आरक्षण से संबंधित था, शुक्रवार को लोकसभा से पारित नहीं हो पाया। घंटों चली चर्चा के बाद इस बिल पर मतदान हुआ, जिसमें इसके पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए सदन के दो तिहाई सदस्यों का समर्थन अनिवार्य होता है, जो इस विधेयक को नहीं मिल पाया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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