
Nepali Brides: सरहद पार से प्यार का रिश्ता निभाने भारत आईं हजारों नेपाली बहुओं के लिए अब एक खुशखबरी है। पूर्णिया के डीएम ने एक ऐसी पहल की है, जिससे उन्हें अपनी भारतीय पहचान आसानी से मिल पाएगी। जिलाधिकारी ने इन महिलाओं को भारतीय नागरिकता दिलाने के लिए विशेष शिविर लगाने के आदेश दिए हैं।
Nepali Brides Citizenship: भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने रिश्ते को अब कानूनी जामा पहनाने की दिशा में पूर्णिया प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। पूर्णिया के जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए उन नेपाली मूल की महिलाओं के लिए भारतीय नागरिकता की राह आसान कर दी है, जिन्होंने भारतीय नागरिकों से विवाह किया है। अब जिले के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाली हजारों नेपाली बहुओं को उनकी पहचान और अधिकार मिल सकेंगे।
पूर्णिया के जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार ने यह आदेश जारी कर साफ कर दिया है कि अब किसी भी नेपाली बहू को नागरिकता के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। उनकी इस पहल से ‘रोटी-बेटी’ के संबंध को नई प्रशासनिक मजबूती मिलेगी और हजारों परिवारों को स्थायित्व प्राप्त होगा।
नागरिकता प्रक्रिया होगी आसान: विशेष समिति और कैंप
जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, Nepali Brides Citizenship पंजीकरण की प्रक्रिया को और अधिक सुलभ तथा पारदर्शी बनाने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति की कमान अपर समाहर्ता (विधि-व्यवस्था) को सौंपी गई है। समिति में अपर पुलिस अधीक्षक, उप निर्वाचन पदाधिकारी और सभी संबंधित प्रखंडों के प्रखंड विकास अधिकारियों को शामिल किया गया है। यह टीम जिले के सभी प्रखंडों में विशेष नागरिकता कैंप लगाएगी, जहां नेपाली महिलाओं को पंजीकरण प्रक्रिया में तकनीकी और कानूनी सहयोग प्रदान किया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
हजारों महिलाओं को मिलेगा फायदा
पूर्णिया जिला नेपाल की सीमा के काफी करीब है। अमौर, बायसी, कसबा, बनमनखी और धमदाहा जैसे प्रखंडों में बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं रहती हैं, जो नेपाल से विवाह कर यहां आई हैं। दशकों से यहां रहने और परिवार बसाने के बावजूद, दस्तावेजों की कमी और जटिल प्रक्रिया के कारण ये महिलाएं भारतीय नागरिकता से वंचित रही हैं। नागरिकता न होने के कारण उन्हें न तो मतदान का अधिकार मिल पाता है और न ही वे सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का पूर्ण लाभ उठा पाती हैं। Nepali Brides Citizenship की इस पहल से ऐसी हजारों महिलाओं के जीवन में स्थायित्व आएगा और वे देश के विकास में सक्रिय भागीदार बन सकेंगी।
प्रशासनिक आदेश के अनुसार, अब महिलाओं को जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने होंगे। गठित समिति के सदस्य स्वयं प्रखंडों में जाकर नागरिकता कैंप लगाएंगे। इन कैंपों में नागरिकता के लिए आवेदन कैसे करना है, कौन से दस्तावेज अनिवार्य हैं और शपथ पत्र की क्या प्रक्रिया है, इन सभी विषयों पर विस्तार से जानकारी और सहायता दी जाएगी। डीएम ने सख्त निर्देश दिए हैं कि यह सारा कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए ताकि आवेदकों को अनावश्यक परेशानी न हो। Nepali Brides Citizenship को आसान बनाने की यह पहल बिहार के अन्य जिलों के लिए भी एक मिसाल बन सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
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भारत और नेपाल के बीच सदियों से चले आ रहे ‘रोटी-बेटी’ के रिश्ते को अब पूर्णिया प्रशासन नई मजबूती दे रहा है। जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उन नेपाली मूल की महिलाओं के लिए भारतीय नागरिकता की राह आसान कर दी है, जिन्होंने भारतीय नागरिकों से विवाह किया है। सीमावर्ती इलाकों में ऐसी हजारों महिलाओं को अब कानूनी पहचान दिलाने के लिए प्रशासन स्वयं उनके द्वार तक पहुंचेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। जिला प्रशासन की इस पहल से भारत में विवाहित नेपाली महिलाओं को उनकी पहचान मिल पाएगी।
DM की ऐतिहासिक पहल: नेपाली दुल्हनें और नागरिकता का अधिकार
पूर्णिया जिलाधिकारी अंशुल कुमार के आदेशानुसार, भारतीय नागरिकता पंजीकरण की प्रक्रिया को और भी सरल और पारदर्शी बनाने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस महत्वपूर्ण समिति की जिम्मेदारी अपर समाहर्ता (विधि-व्यवस्था) को दी गई है। इसमें अपर पुलिस अधीक्षक, उप निर्वाचन पदाधिकारी और सभी संबंधित प्रखंडों के प्रखंड विकास अधिकारी भी शामिल हैं। यह विशेष टीम अब जिले के सभी प्रखंडों में जाकर कैंप लगाएगी, जहाँ नेपाली महिलाओं को पंजीकरण में तकनीकी और कानूनी सहायता मिलेगी। इसका सीधा लाभ उन नेपाली दुल्हनें को मिलेगा जो वर्षों से नागरिकता का इंतजार कर रही थीं।
क्यों ज़रूरी है यह कदम? चुनौतियाँ और समाधान
पूर्णिया जिला नेपाल की सीमा से सटा हुआ है, जिसके चलते अमौर, बायसी, कसबा, बनमनखी और धमदाहा जैसे प्रखंडों में बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं हैं जिन्होंने नेपाल से आकर भारतीय नागरिकों से विवाह किया है। दशकों तक भारत में रहने और अपने परिवार को बसाने के बावजूद, दस्तावेज़ों की कमी और जटिल प्रक्रिया के कारण ये महिलाएं अब तक भारतीय नागरिकता से वंचित थीं। नागरिकता न होने के कारण वे न तो मतदान का अधिकार इस्तेमाल कर पाती थीं और न ही केंद्र एवं राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठा पाती थीं। जिलाधिकारी की यह दूरदर्शी पहल इन हजारों महिलाओं के जीवन में स्थिरता और सम्मान लाएगी।
पंजीकरण प्रक्रिया और प्रशासनिक सहयोग
इस प्रशासनिक आदेश के बाद अब इन महिलाओं को भारतीय नागरिकता के लिए ज़िला मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने होंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। गठित समिति के सदस्य स्वयं प्रखंडों में विशेष कैंप आयोजित करेंगे, जहाँ उन्हें नागरिकता के आवेदन से संबंधित सभी जानकारी और सहायता मिलेगी। इसमें आवेदन कैसे करना है, कौन-कौन से दस्तावेज़ ज़रूरी हैं, और शपथ पत्र की प्रक्रिया क्या होगी, इन सभी विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया जाएगा। जिलाधिकारी ने यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि यह पूरा कार्य एक निश्चित समय-सीमा के भीतर संपन्न हो ताकि आवेदकों को किसी भी तरह की अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
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