
Darbhanga News: हमरा जनगणना मे मैथिली भाषा चाहि… आक्रोश में मिथिला! ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ का होगा सड़क से संसद तक प्रतिकार… नहि सहब… मिथिलाक पहचान पर आघात
मैथिली भाषा: जनगणना के मातृभाषा कॉलम से मैथिली को बाहर किए जाने पर मिथिलांचल में भारी गुस्सा है। विद्यापति सेवा संस्थान ने इसे मातृभाषा के प्रति ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ करार दिया है। अगर जल्द सुधार नहीं हुआ, तो संसद तक आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल मैथिली भाषा को जनगणना के मातृभाषा कॉलम में विकल्प न दिए जाने पर विद्यापति सेवा संस्थान ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। शुक्रवार को हुई बैठक में संस्थान के महासचिव डॉ. बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने साफ शब्दों में कहा कि दस करोड़ से अधिक लोगों की मातृभाषा मैथिली के नाम पर की जा रही ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार शीघ्र ही इसमें सुधार नहीं करती है, तो सड़क से संसद तक इसका विरोध किया जाएगा।
मैथिली भाषा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति: सरकार की मंशा पर सवाल
डॉ. बैजू ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का हवाला देते हुए कहा कि बच्चों में विभिन्न विषयों के प्रति सहज समझ विकसित करने के लिए मातृभाषा में शिक्षा पर जोर दिया गया है। ऐसे में, जनगणना मातृभाषा के रूप में मैथिली को दर्ज करना बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद, केंद्र और बिहार सरकार द्वारा वोट की राजनीति साधने की मंशा से मैथिली के साथ यह बर्ताव समझ से परे है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मिथिला क्षेत्र को ‘अंग-भंग’ करने की कोशिश कर रही है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विरोध के स्वर मुखर: मिथिला की पहचान पर आघात
कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. बुचरू पासवान ने कहा कि करोड़ों लोगों की मातृभाषा मैथिली को जनगणना में दर्ज करने से वंचित करना असंवैधानिक है। आज मिथिला के जन-जन में अपनी मातृभाषा के प्रति चेतना जाग चुकी है और विरोध के स्वर मजबूती से सामने आ रहे हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं. कमलाकांत झा ने बताया कि मैथिली न केवल भाषाई रूप से समृद्ध है, बल्कि इसका वैज्ञानिक आधार और स्वतंत्र लिपि ‘मिथिलाक्षर’ भी है, जो कंप्यूटर फॉन्ट सुविधा से संपन्न है। इसके बावजूद, तुष्टिकरण की राजनीति के तहत इसे आघात पहुंचाना समझ से बाहर है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। समाजसेवी वैद्यनाथ यादव ने सरकार के इस निर्णय पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वर्षों से उपेक्षित मैथिली एक बार फिर उपेक्षा की शिकार हुई है और इसके लिए सभी संगठनों को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए।
जनप्रतिनिधियों से अपील और जन आंदोलन की तैयारी
साहित्यकार डॉ. महेंद्र नारायण राम ने चेतावनी दी कि यदि मैथिली भाषा को और उपेक्षित किया गया, तो अब प्रलाप नहीं, ‘तांडव’ होगा। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से आम मैथिलों के आत्मसम्मान और भाषायी विकास से जुड़े इस मामले को संज्ञान में लेने का आह्वान किया। महात्मा गांधी शिक्षण संस्थान के निदेशक हीरा कुमार झा ने सीबीएसई द्वारा प्राथमिक कक्षाओं में वैकल्पिक भाषा के रूप में मैथिली को शामिल करने का स्वागत किया और आम लोगों से अपने बच्चों को मातृभाषा अपनाने के लिए प्रेरित करने की अपील की। उन्होंने सरकार से जनगणना में मैथिली को जल्द शामिल करने की मांग की।
संस्थान के मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने जन प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के साथ-साथ जनगणना से संबंधित विभिन्न विभागों में कार्यरत मैथिलीभाषी लोगों से भी अपनी मातृभाषा के समुचित सम्मान व विकास के लिए आगे आने का आह्वान किया। संस्थापक सदस्य प्रो. अनिल कुमार झा ने मिथिलावासी एवं प्रवासी मैथिल जन से चल रही जनगणना में अनिवार्य रूप से अपनी मातृभाषा मैथिली दर्ज कराने की अपील की। उन्होंने सरकार के दोषपूर्ण निर्णय के विरुद्ध एकजुट होकर आवाज बुलंद करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मातृभाषा मैथिली के सर्वांगीण विकास के लिए उसके सम्मान की रक्षा को सभी मैथिली भाषी अपना कर्तव्य समझें। मां को प्यार और मातृभाषा को दुलार ही इसे खोया सम्मान दिला पाएगी। हर मिथिलावासी की अभिलाषा है कि जनगणना मातृभाषा कॉलम में अनिवार्य रूप से शत प्रतिशत लोग अपनी मातृभाषा मैथिली दर्ज कराएं ताकि क्षेत्र का सर्वांगीण विकास हो और पाठशाला में शिक्षा का माध्यम मैथिली बन सके।
इस महत्वपूर्ण बैठक में विनोद कुमार झा, प्रो. चंद्रशेखर झा बूढ़ाभाई, डॉ. गणेश कांत झा, डॉ. उदय कांत मिश्र, नंद कुमार झा, डॉ. अजय झा, डॉ. महानंद ठाकुर, दुर्गानंद झा और आशीष चौधरी जैसे प्रमुख लोग उपस्थित थे।







