
प्रधान शिक्षक नियुक्ति: बिहार के अलीनगर प्रखंड से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां 18 प्राथमिक विद्यालय आज भी बिना स्थायी प्रधान शिक्षक के चल रहे हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई और मिड-डे मील दोनों पर बुरा असर पड़ रहा है। मामला ये है कि नियुक्ति पत्र मिलने के बावजूद कई सफल अभ्यर्थी पदभार ग्रहण नहीं कर रहे हैं, जिसके चलते शिक्षा व्यवस्था डगमगा रही है।
प्रधान शिक्षक नियुक्ति के बाद भी खाली पद
अलीनगर प्रखंड के 18 प्राथमिक विद्यालय में स्थायी प्रधान शिक्षक न होने के कारण पठन-पाठन और मध्याह्न भोजन में अनियमितता साफ दिख रही है। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने बीपीएससी के माध्यम से प्रधान शिक्षक पद के लिए परीक्षा आयोजित की थी। पहले चरण में सफल अभ्यर्थियों को कई महीने पहले नियुक्ति पत्र दिए गए थे, लेकिन अलीनगर प्रखंड के 21 विद्यालयों में प्रधान शिक्षकों ने योगदान नहीं दिया था। इसके बाद अप्रैल महीने के आखिरी सप्ताह में इन प्रधान शिक्षकों में से 17 विद्यालयों के लिए नई नियुक्ति की गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। हालांकि, पदभार ग्रहण करने के लिए कोई बाध्यता न होने के कारण इनमें से केवल 3 शिक्षकों ने ही अपने आवंटित विद्यालयों में योगदान दिया, जबकि 14 शिक्षकों ने 30 अप्रैल की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी योगदान नहीं लिया। परिणामस्वरूप, आज भी प्रखंड क्षेत्र के 18 अलीनगर प्राथमिक विद्यालय प्रभारी शिक्षकों के भरोसे ही चल रहे हैं।
क्यों नहीं ले रहे हैं शिक्षक पदभार?
कई विद्यालयों में स्थानीय शिक्षक प्रभारी होने के कारण विद्यालय का संचालन ठीक से नहीं कर पा रहे हैं। इसका सीधा असर छोटे बच्चों के पठन-पाठन और मध्याह्न भोजन पर पड़ रहा है। प्रधान शिक्षकों के लिए नियुक्ति पत्र मिलने के बाद भी पदभार ग्रहण न करने का मुख्य कारण यह माना जा रहा है कि उन्हें मनपसंद जगह नहीं मिली है। साथ ही, योगदान न लेने पर कोई कार्रवाई न होने की शर्त के कारण उन्हें इन पदों में कोई विशेष रुचि नहीं दिख रही है। इसी वजह से वे पदभार ग्रहण करने से बच रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
विभाग की चुप्पी और बच्चों का भविष्य
प्रधान शिक्षकों की नियुक्ति पत्र मिलने के बाद भी पदभार न लेने के संबंध में जब प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मो. मस्लेहउदीन से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि “नियुक्ति पत्र मिलने के बाद भी अगर शिक्षक ने योगदान नहीं लिया है, तो इसमें हम क्या कर सकते हैं। इस मुद्दे पर विभाग ही कोई निर्णय ले सकता है।” उनकी यह प्रतिक्रिया विभाग की निष्क्रियता को दर्शाती है, जिसका सीधा खामियाजा बच्चों के भविष्य को भुगतना पड़ रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/







