प्रवासी श्रमिक: बिहार सरकार अब अपने राज्य के प्रवासी कामगारों के लिए एक बड़ा डेटा बैंक तैयार करने जा रही है। इसका मकसद बाहर काम करने वाले श्रमिकों की सही जानकारी जुटाना और उन्हें बेहतर कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना है। इसके लिए प्रदेश के बाहर और विदेशों में कार्यरत श्रमिकों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है।
पटना। श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के सचिव दीपक आनंद ने दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान में एक कार्यक्रम के उद्घाटन के अवसर पर यह बात कही। उन्होंने बताया कि नई श्रम संहिताओं पर भी विभाग कार्य कर रहा है, जिसे जल्द ही मंत्रिमंडल से स्वीकृति मिल जाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
डेटा बैंक और ‘प्रवासी श्रमिक’ पंजीकरण की अनिवार्यता
दीपक आनंद ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा हर प्रवासी कामगार का डेटा बैंक तैयार किया जाएगा। इसके लिए अन्य प्रदेशों और विदेशों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए श्रमिक पंजीकरण अनिवार्य किया जा रहा है ताकि उनकी सटीक जानकारी उपलब्ध हो सके। यह कदम प्रवासी श्रमिक कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
विभाग के विशेष सचिव सुनील कुमार यादव ने निर्माण श्रमिकों से बिहार भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्माकर कल्याण बोर्ड में अधिक से अधिक संख्या में अपना निबंधन कराने का आग्रह किया, ताकि वे 16 जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें। उन्होंने जोर दिया कि श्रमिकों को उनके हक से वंचित नहीं किया जाएगा।
कल्याणकारी योजनाएं और न्यूनतम मजदूरी का प्रावधान
श्रमायुक्त राजेश भारती ने बताया कि राज्य के श्रमिकों और प्रवासी श्रमिकों के कल्याण के लिए कई योजनाएं बनाई गई हैं और उन्हें सफलतापूर्वक लागू भी किया जा रहा है। सभी नियोजनों के लिए न्यूनतम मजदूरी देना अनिवार्य कर दिया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस अवसर पर छह कारखाना प्रबंधकों द्वारा कुल 63 श्रमिकों को उनके कुशल कार्य के लिए सम्मानित किया गया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







