Patna Boat Accident News: पटना जिले के बाढ़ प्रखंड स्थित उमानाथ घाट पर गुरुवार को हुए नाव हादसे के बाद प्रशासन ने नदी परिवहन व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। शुक्रवार को जिला पदाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के शर्मा ने जिले के सभी प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की, जिसमें यह बड़ा फैसला लिया गया।
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पटना नाव हादसे के बाद प्रशासन का बड़ा फैसला
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि गंगा समेत किसी भी नदी में बिना निबंधन वाली नावों का संचालन नहीं होने दिया जाएगा। एक विशेष अभियान चलाकर सभी नावों का पंजीकरण कराया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम हालिया उमानाथ घाट हादसे के बाद यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिसने नदी मार्ग से होने वाले आवागमन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। प्रशासनिक जांच में सामने आया है कि कई घाटों पर नावों में तय क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाया जा रहा था, यहां तक कि मवेशियों और छोटे-बड़े वाहनों को भी लादा जा रहा था, जो बड़े हादसे का कारण बन सकता था।
पहले चरण में प्रखंडवार विशेष अभियान चलाकर सभी नावों का निबंधन कराया जाएगा। इसके बाद यदि कोई नाव बिना पंजीकरण के चलती मिली तो उसे तत्काल जब्त कर लिया जाएगा। केवल नाविक ही नहीं, बल्कि नाव मालिकों की भी पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि जन-सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं होगा।
घाटों पर बढ़ाई गई निगरानी और नए सुरक्षा नियम
जिला प्रशासन ने बड़े घाटों पर विशेष निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। एसडीओ और एसडीपीओ को निर्देश दिया गया है कि वे नाव संचालकों और नाविकों के साथ बैठक कर सुरक्षा मानकों की जानकारी दें। वहीं, छोटे घाटों की निगरानी की जिम्मेदारी अंचल अधिकारियों और थानाध्यक्षों को सौंपी गई है। अगले दो दिनों के भीतर सभी प्रमुख घाटों पर जागरूकता बैठकें आयोजित की जाएंगी।
गंगा किनारे स्थित प्रमुख घाटों पर जल्द ही आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाएंगे। दीघा पाटीपुल घाट, पर्यटन घाट, जेपी सेतु पूर्वी घाट, गांधी घाट, कंगन घाट, गायघाट, कच्ची दरगाह घाट, नासरीगंज घाट, हल्दी छपरा घाट, उमानाथ घाट और सीढ़ी घाट जैसे स्थानों को प्राथमिकता सूची में रखा गया है। इन नियंत्रण कक्षों में दंडाधिकारी, पुलिस अधिकारी, प्रशिक्षित गोताखोर और अन्य कर्मियों की तैनाती होगी। प्रशासन ने घाटों पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगाने का भी निर्णय लिया है, जिसके माध्यम से यात्रियों को लगातार सुरक्षा नियमों की जानकारी दी जाएगी और खराब मौसम में चेतावनी प्रसारित की जाएगी।
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सुरक्षित नाव परिचालन के लिए कड़े मानदंड
नावों के निबंधन की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए अंचलवार रोस्टर तैयार किया जा रहा है। निबंधन से पहले मोटर यान निरीक्षक नाव की तकनीकी और सुरक्षा जांच करेंगे। नाव की वहन क्षमता, लाइफ जैकेट की उपलब्धता, लाइफ ब्वाय, फर्स्ट एड किट, रस्सी और अन्य जरूरी उपकरणों की जांच के बाद ही पंजीकरण दिया जाएगा। निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वाली नावों को अनुमति नहीं मिलेगी।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रत्येक निबंधित नाव पर नाविक का नाम, पता, मोबाइल नंबर, निबंधन संख्या और अधिकतम वहन क्षमता स्पष्ट रूप से लिखना अनिवार्य होगा। साथ ही नाव के साथ प्रतिनियुक्त प्रशिक्षित गोताखोर का विवरण भी अंकित करना होगा। इसका उद्देश्य किसी आपात स्थिति में त्वरित राहत और बचाव कार्य सुनिश्चित करना है।
सुरक्षित नाव परिचालन के लिए कई नए प्रतिबंध भी लागू किए गए हैं:
- सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले किसी भी निजी या सरकारी नाव का संचालन नहीं होगा।
- क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने पर लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
- केवल चिह्नित घाटों से ही नावों का संचालन होगा।
- आंधी, तूफान, तेज हवा या प्रतिकूल मौसम की स्थिति में नाव परिचालन पूरी तरह बंद रहेगा।
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जिला प्रशासन का मानना है कि नदी घाटों पर बढ़ती आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन आवश्यक है। उमानाथ घाट हादसे के बाद शुरू किया गया यह अभियान आने वाले समय में गंगा किनारे नाव संचालन की पूरी व्यवस्था को अधिक नियंत्रित और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।







