
Samrat Cabinet: 20 मई 2026 का दिन बिहार के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 13 ऐसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी, जिनका सीधा असर आने वाले वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार, स्वास्थ्य और पर्यटन पर दिखने वाला है। इन फैसलों ने न केवल बिहार के विकास का रोडमैप तैयार किया है, बल्कि राज्य की बदलती प्राथमिकताओं को भी दर्शाया है।
Samrat Cabinet के फैसलों का आर्थिक रोडमैप
कैबिनेट ने राज्य में कृषि और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं।
- नालंदा में 8818 करोड़ का राइस प्रोसेसिंग मेगा प्रोजेक्ट: नालंदा जिले के अरावां, बेन में मेसर्स पटेल एग्रोइंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड को बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति 2016 के तहत वित्तीय प्रोत्साहन की मंजूरी मिली। यह 960 एमटीपीडी क्षमता का Par-Boiled Rice Plant एक आधुनिक चावल प्रसंस्करण इकाई होगी। लगभग 8818 करोड़ रुपये के भारी-भरकम औद्योगिक निवेश से 185 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। यह परियोजना केवल एक राइस मिल नहीं, बल्कि बिहार के कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन के साथ उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का एक बड़ा प्रयास है। इससे किसानों को बेहतर बाजार, स्थानीय ट्रांसपोर्ट सेक्टर को काम, वेयरहाउसिंग और सप्लाई चेन का विस्तार मिलेगा, साथ ही फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में और निवेश की संभावनाएँ बढ़ेंगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
- कैमूर में एथेनॉल प्लांट और पावर यूनिट: कैमूर जिले के कुदरा में ईएसई एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड की 60 KLPD एथेनॉल प्लांट और 2 मेगावाट को-जेनरेशन पावर प्लांट परियोजना को भी मंजूरी दी गई। लगभग 73.45 करोड़ रुपये के निवेश से 93 लोगों को रोजगार मिलेगा। यह भारत सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे गन्ना और मक्का किसानों की मांग बढ़ेगी, ग्रामीण उद्योग विकसित होंगे और हरित ऊर्जा नीति को बल मिलेगा।
- गया में 428 करोड़ की जलाशय परियोजना: गया जिले के डोभी प्रखंड में औद्योगिक क्षेत्र के लिए जल उपलब्ध कराने हेतु 428.08 करोड़ रुपये की परियोजना को हरी झंडी दी गई। इसमें जलाशय निर्माण, पाइपलाइन नेटवर्क और मोरहर नदी पर संरचना निर्माण शामिल है। गया क्षेत्र अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का हिस्सा बन रहा है, और उद्योगों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक प्राथमिक आवश्यकता है। यह परियोजना टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड इंडस्ट्रीज को आकर्षित करेगी। इस परियोजना के लिए लगभग 324 एकड़ भूमि अधिग्रहित होगी और इसे 48 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है।
ग्रामीण स्वास्थ्य, खेल और प्रशासनिक सुधार
सरकार ने आम जनमानस के जीवन को बेहतर बनाने और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने पर भी जोर दिया है।
- ग्रामीण स्वास्थ्य के लिए 747 करोड़ रुपये: ग्रामीण स्थानीय निकायों के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा पर केंद्र सरकार की हेल्थ सेक्टर ग्रांट से 747.97 करोड़ रुपये जारी करने की मंजूरी दी गई। यह राशि पंचायत स्तरीय स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीण चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर खर्च होगी, जिससे गांव स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा।
- छठे राज्य वित्त आयोग की अवधि में विस्तार: कैबिनेट ने छठे राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा अवधि को 2026-27 तक बढ़ा दिया। यह इसलिए जरूरी था ताकि पंचायतों और नगर निकायों को फंड मिलने में कोई रुकावट न आए और विकास कार्य जारी रह सकें।
- विज्ञान परिषद में नए पदों को मंजूरी: बिहार काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी के लिए 94 स्वीकृत पदों में से 87 पदों को पुनर्स्थापित करने और अतिरिक्त 53 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना और प्रशासनिक क्षमता बढ़ाना है।
- यंग प्रोफेशनल्स पॉलिसी 2026 लागू: विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने “यंग प्रोफेशनल्स पॉलिसी 2026” को मंजूरी दी, जिसके तहत तकनीकी संस्थानों, विभागीय परियोजनाओं और रिसर्च एवं टेक्निकल सपोर्ट में विशेषज्ञ युवा पेशेवरों की नियुक्ति की जाएगी। यह सरकारी विभागों में तकनीकी विशेषज्ञता की कमी को दूर करने में सहायक होगी।
- खेलों के लिए बड़ा निवेश: अरवल जिले के करपी अंचल में 6.81 एकड़ भूमि पर एक आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनेगा। इसी तरह, औरंगाबाद जिले के देव अंचल में 13.09 एकड़ भूमि पर और सहरसा जिले के सलखुआ में 6.61 एकड़ भूमि पर आउटडोर स्टेडियम को मुख्यमंत्री विकास योजना के तहत मंजूरी मिली है। ये परियोजनाएं क्षेत्रीय खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं और खेल आधारित रोजगार के अवसर प्रदान करेंगी।
सुरक्षा सुदृढ़ीकरण और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी
सीमा सुरक्षा और वैश्विक पहचान के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
- बिहार पुलिस में नया “आईजी बॉर्डर” पद: राज्य सरकार ने सीमाई सुरक्षा मजबूत करने के लिए आईजी बॉर्डर का नया पद सृजित किया है। यह पद नेपाल और अन्य संवेदनशील अंतरराज्यीय मार्गों से जुड़ी बिहार की सीमाओं पर सुरक्षा, खुफिया निगरानी और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- गया से बैंकॉक सीधी उड़ान: कैबिनेट ने इंडिगो एयरलाइंस द्वारा गया-बैंकॉक नॉन-स्टॉप अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवा को मंजूरी दी, जिसके लिए सरकार ₹10.40 करोड़ तक की वायबिलिटी गैप फंडिंग देगी। यह फैसला गया को बौद्ध पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में और मजबूत करेगा, जिससे विदेशी पर्यटन बढ़ेगा, होटल उद्योग, स्थानीय व्यापार और अंतरराष्ट्रीय पहचान को लाभ मिलेगा। टैक्सी, ट्रैवल एजेंसी, रेस्तरां, हैंडीक्राफ्ट और स्थानीय बाजार सभी को सीधा फायदा मिलेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
- एसटीएफ में 50 विशेषज्ञ जवान: वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत करने के लिए एसटीएफ में 50 विशेष दक्ष पुलिसकर्मियों की तैनाती को मंजूरी दी गई है, जिन्हें अधिकतम 15 वर्ष तक प्रतिनियुक्ति पर रखा जाएगा। यह नक्सल विरोधी अभियानों को और अधिक पेशेवर और इंटेलिजेंस आधारित बनाने की सरकार की मंशा को दर्शाता है।
Samrat Cabinet Decisions में राज्य सरकार की नई रणनीति स्पष्ट दिखती है। यह कैबिनेट ग्रामीण विकास + निवेश + रोजगार + पर्यटन + सुरक्षा का मिश्रित मॉडल पेश करती है, जिसमें सरकार विकास और प्रशासनिक नियंत्रण दोनों को साथ लेकर चलना चाहती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







