
Muzaffarpur: बिहार में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। बिहार पुलिस की आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) ने मुजफ्फरपुर से मोहम्मद मुस्तफा नामक एक युवक को गिरफ्तार किया है, जिस पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का संगीन आरोप है। यह कार्रवाई देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
एटीएस ने शुक्रवार को गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर मुस्तफा को दबोचा। शुरुआती जांच में पता चला है कि मुस्तफा भारत के कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी कर रहा था। वह इन जगहों के फोटो, वीडियो और सटीक भौगोलिक लोकेशन पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेज रहा था। आरोपी इंटरनेट मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए सीमा पार बैठे देश-विरोधी तत्वों के लगातार संपर्क में था। यह पूरा मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान जासूसी के तार जोड़ता दिख रहा है।
Pakistan SPY: हैंडलर्स और कनेक्शन
एटीएस की शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाले नाम सामने आए हैं। गिरफ्तार मोहम्मद मुस्तफा सीधे तौर पर पाकिस्तानी हथियार तस्कर गिरोह से जुड़ा हुआ था। वह सीमा पार बैठे शहजाद भट्टी नामक तस्कर के लगातार संपर्क में था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इसके अलावा, जांच एजेंसी को राणा हुनैन नाम के एक अन्य संदिग्ध सहयोगी के बारे में भी सुराग मिला है। सुरक्षा एजेंसियां अब इन सभी कड़ियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क को समझने की कोशिश कर रही हैं।
डिलीट डेटा और फंडिंग की जांच
मुस्तफा की गिरफ्तारी के बाद उसके पास से मोबाइल फोन और कई डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं। फोरेंसिक टीम इन उपकरणों की गहराई से जांच कर रही है। पकड़े जाने के डर से मुस्तफा ने अपने फोन से कई महत्वपूर्ण चैट और बैकअप फाइलें डिलीट कर दी थीं। तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से इस डिलीटेड डेटा को रिकवर किया जा रहा है। शुरुआती जांच में संदिग्ध गतिविधियों के कई पुख्ता वैज्ञानिक संकेत मिल चुके हैं, जो इस एटीएस कार्रवाई की गंभीरता को दर्शाते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। जांच का दायरा अब मुस्तफा के पूरे सिंडिकेट तक फैल गया है। एटीएस की टीमें आरोपी के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) को खंगाल रही हैं और उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी नजर रख रही हैं। जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि मुस्तफा को इस काम के लिए फंडिंग कहां से मिल रही थी। उसके बैंक खातों के वित्तीय लेन-देन और हाल के यात्रा इतिहास की गहन वैज्ञानिक जांच जारी है।
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