Bihar MLC Election News: बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर राज्य की राजनीति में गहमागहमी बढ़ गई है। भारत निर्वाचन आयोग ने विधान परिषद की नौ द्विवार्षिक सीटों और एक रिक्त सीट पर उपचुनाव के लिए विधिवत अधिसूचना जारी कर दी है। इस अधिसूचना के साथ ही नामांकन प्रक्रिया भी आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है, जिससे चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। हालांकि, नामांकन के पहले दिन तक किसी भी संभावित उम्मीदवार ने अपना पर्चा दाखिल नहीं किया। इन महत्वपूर्ण चुनावों के लिए उम्मीदवारों द्वारा नामांकन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि आठ जून निर्धारित की गई है। यह चुनाव बिहार के राजनीतिक समीकरणों को साधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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नामांकन का अंतिम दिन: कौन होंगे नए चेहरे?
इस बार के विधान परिषद चुनावों में राजनीतिक दलों की रणनीतियों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसी प्रबल संभावना है कि भाजपा के संजय मयूख और राजद के सुनील कुमार सिंह, इन दो मौजूदा चेहरों को छोड़कर, शेष सभी उम्मीदवार बिल्कुल नए हो सकते हैं। इस संभावित फेरबदल ने राजनीतिक पंडितों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अधिकांश उम्मीदवारों के आठ जून को, जो कि नामांकन की अंतिम तिथि है, अपने पर्चे दाखिल करने की उम्मीद है। यह भी जानकारी मिली है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सभी प्रत्याशियों का नामांकन एक ही दिन आयोजित किया जाएगा, ताकि एकजुटता का संदेश दिया जा सके।
Bihar Politics News के जानकार इस चुनाव को दलों के अंदरूनी संतुलन और आगामी बड़े चुनावों की तैयारी के रूप में देख रहे हैं। भाजपा, जदयू और अन्य सहयोगी दलों के बीच सीटों का बंटवारा और उम्मीदवारों का चयन सामाजिक एवं जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है, ताकि सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व मिल सके।
एनडीए में सीटों का बंटवारा और प्रमुख दावेदार
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप दे दिया गया है, जो गठबंधन की एकता को दर्शाता है। कुल 10 सीटों में से जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के खाते में चार सीटें आई हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करने का मौका मिलेगा। इसके अतिरिक्त, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) और चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को एक-एक सीट मिली है। यह बंटवारा सहयोगी दलों को उचित प्रतिनिधित्व देने की एनडीए की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
जदयू के उम्मीदवारों का चयन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं अपने वरिष्ठ सहयोगियों, जैसे कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी, के साथ विचार-विमर्श करके करेंगे। इन नेताओं के बीच सोमवार को भी एक विशेष मुलाकात हुई थी, जिसे उम्मीदवारों के चयन के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों की मानें तो जदयू कोटे से वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का नाम लगभग तय माना जा रहा है। वहीं, रालोमो से राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश, जो वर्तमान में सम्राट चौधरी की सरकार में पंचायती राज कैबिनेट मंत्री हैं, का एनडीए उम्मीदवार बनना तय है। इस प्रकार, गठबंधन ने युवा और अनुभवी दोनों तरह के चेहरों को मौका देने का प्रयास किया है।
राजद की चुनावी रणनीति और संभावित उम्मीदवार
विपक्षी खेमे में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) भी अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटा है। अपने संख्या बल के आधार पर, यह लगभग तय माना जा रहा है कि विधान परिषद की एक सीट राजद के खाते में आएगी। वर्तमान में राजद की दो सीटें रिक्त हो रही हैं। इस एक सीट के लिए पार्टी के अंदर कई नामों पर मंथन चल रहा है। इनमें वर्तमान विधान पार्षद सुनील कुमार सिंह और पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को यह तय करना होगा कि इन दोनों अनुभवी नेताओं में से किसे मौका दिया जाए, या फिर किसी नए चेहरे पर दांव खेला जाए।
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बिहार विधान परिषद चुनाव राज्य की राजनीति का एक अभिन्न हिस्सा हैं, जो सरकार और विपक्ष दोनों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। ये चुनाव केवल सीटों पर जीत-हार तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे राजनीतिक दलों की आंतरिक शक्ति, गठबंधन की एकजुटता और भविष्य की राजनीतिक दिशा का संकेत भी देते हैं। सभी राजनीतिक दलों की निगाहें अब आठ जून पर टिकी हैं, जब नामांकन प्रक्रिया समाप्त होगी और उम्मीदवारों की अंतिम सूची सामने आएगी। इसके बाद ही चुनावी समीकरण और अधिक स्पष्ट हो पाएंगे।
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