Patna Sand Mafia News: बिहार की राजधानी पटना के धाना-परेव क्षेत्र में अवैध बालू खनन और ढुलाई के कारण सोन कैनाल सिंचाई नहर को भारी नुकसान पहुँचाया गया है। बालू माफियाओं ने इस महत्वपूर्ण नहर को कई जगहों से काटकर पूरी तरह बर्बाद कर दिया है, जिससे सिंचाई व्यवस्था चरमरा गई है। इस गंभीर लापरवाही के कारण राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है, वहीं आगामी मानसून सत्र से ठीक पहले स्थानीय किसानों के लिए सिंचाई का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
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पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता मणिभूषण प्रताप सेंगर ने साक्ष्यों के साथ इस मामले की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद मई 2024 के अंतिम सप्ताह में डीएसपी पंकज कुमार शर्मा ने इस पर संज्ञान लिया। पुलिस अधिकारियों ने तत्काल बिक्रम, दुल्हिनबाजार और रानीतलाब के थानाध्यक्षों को पत्र भेजकर माफियाओं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। सिंचाई विभाग की कथित सुस्ती और पुलिस की अनदेखी ने माफियाओं को प्रतिबंधित रास्तों पर भारी वाहन चलाने की छूट दे दी, जिससे यह सरकारी संपत्ति नष्ट हो गई।
सोन कैनाल पर बालू माफिया का राज: चौकीदारों की फौज क्यों हुई फेल?
सोन कैनाल जैसी महत्वपूर्ण सिंचाई व्यवस्था के रखरखाव पर सरकार हर साल बड़ा बजट खर्च करती है। इस नहर की सुरक्षा और निगरानी के लिए जमीनी स्तर पर चौकीदार, कनीय अभियंता और सहायक अभियंता तैनात किए जाते हैं। इनकी कार्यप्रणाली की देखरेख खगौल स्थित कार्यपालक अभियंता के मुख्य कार्यालय से की जाती है। इन सब व्यवस्थाओं के बावजूद, बालू माफियाओं ने पटना के धाना-परेव कैनाल को अपनी गाड़ियों के आवागमन के लिए कई स्थानों से काट डाला।
अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत जीपीएस युक्त लाइव वीडियो और तस्वीरों से यह स्पष्ट होता है कि संबंधित अधिकारी फील्ड में जाकर निरीक्षण करने के बजाय अपने वातानुकूलित कमरों में ही बैठकर फाइलों का निपटारा करने में व्यस्त रहे। उनकी निष्क्रियता ने माफियाओं को अपनी मनमानी करने का अवसर दिया। परिणामस्वरूप, किसानों के लिए जीवनरेखा मानी जाने वाली यह नहर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
पुलिस और सिंचाई विभाग में तकरार: कौन है इस लापरवाही का जिम्मेदार?
इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद सोन कैनाल के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। सिंचाई विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि धाना-परेव कैनाल के बांध पर भारी वाहनों का परिचालन पूरी तरह से प्रतिबंधित है। विभाग ने बांध की सुरक्षा के लिए मजबूत लोहे के बैरियर भी लगाए थे, लेकिन बालू माफियाओं ने उन्हें उखाड़कर चोरी कर लिया।
सिंचाई विभाग का दावा है कि इस तोड़फोड़ को लेकर पिछले साल ही रानीतलाब और बिहटा थानों में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। विभाग के अधिकारियों का आरोप है कि पुलिस ने समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे प्रतिबंधित रास्तों पर अवैध वाहनों का चलना जारी रहा। इसी कारण नहर अंततः टूट गई। यह आरोप-प्रत्यारोप दोनों विभागों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है।
इस घटना ने बिहार सिंचाई व्यवस्था की खामियों को उजागर किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में प्रशासनिक महकमे को चेतावनी दी थी कि कानून के साथ खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों को एक महीने के भीतर निलंबित कर दिया जाएगा। अब लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर जल्द ही कार्रवाई होने की संभावना है। यह दिखाता है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है।
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शिकायतकर्ता अधिवक्ता मणिभूषण प्रताप सेंगर ने बताया कि 2024 में भी इस मामले में एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी ने संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश भी जारी किए थे, लेकिन उनका कोई खास असर नहीं हुआ। नहर के क्षतिग्रस्त होने से राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है।
इस भारी क्षति की भरपाई और दोषियों से वसूली के लिए अब बहुत जल्द पटना उच्च न्यायालय में एक नई जनहित याचिका दायर की जाएगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें यह कदम दिखाता है कि न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से इस गंभीर समस्या का समाधान खोजा जा रहा है। किसानों और आम जनता के लिए यह एक बड़ी राहत की उम्मीद है।







