TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जबरदस्त उथल-पुथल मची है। विधानसभा चुनावों के बाद शुरू हुई पार्टी की अंदरूनी बगावत अब शीर्ष नेतृत्व तक पहुँच गई है। नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने एक विशेष अधिवेशन में बड़ा निर्णय लेते हुए पार्टी संस्थापक ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटा दिया है। उनकी जगह वरिष्ठ नेता अरूप रॉय को ‘असली’ टीएमसी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। इस कदम से पार्टी में समानांतर नेतृत्व ढांचा तैयार हो गया है, जिससे तृणमूल कांग्रेस पर कब्जे की लड़ाई अब सीधे संगठन के मूल स्वरूप तक पहुँच गई है।
कौन हैं तृणमूल के नए अध्यक्ष अरूप रॉय?
अरूप रॉय पश्चिम बंगाल की राजनीति में, खासकर हावड़ा जिले में, एक बड़ा नाम माने जाते हैं। एक समय वह ममता बनर्जी के बेहद करीबी और भरोसेमंद सिपहसालारों में से थे। 70 वर्षीय अरूप रॉय हावड़ा मध्य विधानसभा सीट से लगातार चार बार विधायक चुने गए हैं। उन्होंने 2011, 2016, 2021 और 2026 के विधानसभा चुनावों में इस सीट पर जीत दर्ज की है।






वह 2011 से 2026 तक ममता बनर्जी सरकार में सहकारिता विभाग के कैबिनेट मंत्री रहे हैं। लंबे समय तक हावड़ा जिले के टीएमसी जिलाध्यक्ष रहने के कारण जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच उनका गहरा प्रभाव है। पेशे से वकील रहे अरूप रॉय 1998 में टीएमसी के गठन से पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) का हिस्सा थे। ममता बनर्जी ने जब अपनी अलग पार्टी बनाई, तब से ही वह टीएमसी के साथ मजबूती से खड़े रहे हैं। उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके पास कुल 4.9 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जबकि उन पर 22.8 लाख रुपये की देनदारी है। उनकी घोषित वार्षिक आय 31.2 लाख रुपये है।
चुनाव आयोग का रुख करेगा बागी गुट
विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के करीब छह हफ्ते बाद यह बड़ा फेरबदल हुआ है। आधे घंटे तक चली बागी टीएमसी गुट की बैठक के बाद, बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने मीडिया के सामने अरूप रॉय के नाम का ऐलान किया। बागी गुट ने स्पष्ट किया है कि वे खुद को असली अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के रूप में मान्यता दिलाने और पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावा ठोकने के लिए जल्द ही भारत निर्वाचन आयोग (ECI) का दरवाजा खटखटाएंगे। इसके साथ ही, नई ‘तृणमूल राष्ट्रीय कार्य समिति’ भी पेश की जाएगी।
यह फैसला तब आया है, जब ममता बनर्जी ने न्यू टाउन के एक होटल में बागी विधायकों और पार्टी पार्षदों के साथ एक अलग बैठक की थी। कोलकाता में हुई बागी गुट की बैठक में अरूप रॉय, जावेद खान, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, अरूप विश्वास, असीम बोस, जूई विश्वास और तारक सिंह जैसे कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। इनके अतिरिक्त, हावड़ा, कोलकाता, बहरामपुर, मुर्शिदाबाद समेत कई अन्य जिलों के बागी विधायक, पार्षद और पूर्व जनप्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए।
बैठक को संबोधित करते हुए रितब्रत बनर्जी ने तर्क दिया, ‘पार्टी के संविधान के अनुसार हर 3 साल में राष्ट्रीय कार्य समिति (NWC) का गठन होना अनिवार्य है। 2022 में बनी पिछली समिति बिना पुनर्गठन के ही अपना कार्यकाल पूरा कर चुकी है।’
बागी गुट की नई नियुक्तियां
बैठक में 10 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति को मंजूरी दी गई, जिसका विस्तार 30 सदस्यों तक किया गया। ध्वनि मत से नए पदाधिकारियों का चुनाव किया गया, जो इस प्रकार हैं:
| पद | नाम |
|---|---|
| अध्यक्ष | अरूप रॉय (हावड़ा सेंट्रल से वरिष्ठ विधायक) |
| उपाध्यक्ष | अरूप विश्वास, फिरहाद हकीम, रथिन घोष, सबीना यास्मीन |
| महासचिव | ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान, संदीपन साहा |
| कोषाध्यक्ष | अखरुज्जमां अंसारी |
यह नई समिति तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक वैकल्पिक शक्ति केंद्र के रूप में उभरी है।
ममता को ‘मुख्य सलाहकार’ बनने का ऑफर, कानूनी लड़ाई की तैयारी
बागी गुट ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अभिषेक बनर्जी को निलंबित नहीं किया है। हालांकि, नई समिति और नए महासचिवों की नियुक्ति के साथ ही अभिषेक बनर्जी अपने पद से स्वतः ही विस्थापित हो गए हैं। बागी गुट की ओर से ममता बनर्जी को ‘मुख्य सलाहकार’ बनने का प्रस्ताव दिया गया है।
ममता बनर्जी के खेमे ने इस पूरी प्रक्रिया को सिरे से खारिज कर दिया है। वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने स्पष्ट किया कि असंतुष्टों के पास ऐसा सत्र बुलाने या संगठनात्मक ढांचे को बदलने का कोई अधिकार नहीं है।
कुणाल घोष ने कहा, ‘टीएमसी और ममता बनर्जी एक दूसरे के पर्याय हैं।’
ममता समर्थक खेमे ने संकेत दिया है कि इस घटनाक्रम के बाद कानूनी लड़ाई शुरू हो सकती है। फिरहाद हकीम, अरूप विश्वास, अरूप रॉय, जावेद खान जैसे नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। यह राजनीतिक उठापटक पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर रही है।







