Bihar Jail Suspension: बिहार में सुशासन के प्रति ‘सम्राट सरकार’ की प्रतिबद्धता एक बार फिर दिखी है। बिहार के गया सेंट्रल जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट सुदर्शन प्रसाद सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। गृह विभाग (कारा) की ओर से उनके निलंबन का आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। डिप्टी सुपरिटेंडेंट पर अपराधियों से सांठगांठ और ड्यूटी में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप हैं।
जेल में गांजा मिलने पर भी नहीं हुई FIR, सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ीं
मिली जानकारी के अनुसार, डिप्टी सुपरिटेंडेंट सुदर्शन प्रसाद सिंह के खिलाफ कई गंभीर शिकायतें थीं। उन पर आरोप है कि उन्होंने जेल में गांजा बरामद होने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं कराई। इसके अलावा, बिना किसी आधिकारिक एंट्री के बाहरी लोगों को कैदियों से मुलाकात कराने और स्टाफ के साथ बदसलूकी करने जैसे भी आरोप उन पर लगे हैं। गृह विभाग अब इन सभी आरोपों की विस्तृत विभागीय जांच करेगा।






निलंबन की अवधि के दौरान, सुदर्शन प्रसाद सिंह का मुख्यालय खुदीराम बोस सेंट्रल जेल, मुजफ्फरपुर तय किया गया है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर उन्हें सेवा से बर्खास्त भी किया जा सकता है।
यह था पूरा मामला: 16 जुलाई की घटना ने खोली पोल
इस पूरे मामले की जड़ 16 जुलाई की एक घटना से जुड़ी है। उस दिन जेल के एक वार्ड की तलाशी ली जा रही थी। चेकिंग के दौरान बंदी रमेश यादव उर्फ सुमन यादव के पास से गांजा बरामद हुआ। जेल सुपरिटेंडेंट ने तत्काल सुदर्शन प्रसाद सिंह को इस मामले में आरोपित कैदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया, लेकिन उन्होंने वरिष्ठ अधिकारी के आदेश को दरकिनार करते हुए एफआईआर दर्ज कराने से साफ इनकार कर दिया। इस हरकत ने अपराधियों के प्रति उनकी कथित सहानुभूति को उजागर कर दिया।
गृह विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि सुदर्शन सिंह जेल के सुरक्षा नियमों की भी सरेआम धज्जियां उड़ा रहे थे। वे कैदियों के परिजनों और बाहरी लोगों को अपना दोस्त बताकर सीधे अपने ऑफिस में बुलाते थे और बिना किसी रोक-टोक के कैदियों से उनकी मुलाकात कराते थे। इसके लिए जेल के गेट रजिस्टर में कोई एंट्री भी नहीं की जाती थी।
जेल सुपरिटेंडेंट ने उन्हें ऐसा करने से कई बार मौखिक रूप से मना किया था, लेकिन उन पर कोई असर नहीं हुआ। उनके इस रवैये से जेल के कक्षपाल (गार्ड्स) और अन्य अधिकारी भी भारी दहशत में थे। अगर कोई जेल कर्मी नियमों का पालन करते हुए बिना चेकिंग के किसी को अंदर जाने से रोकता, तो सुदर्शन उसी कर्मी पर भड़क जाते थे और गाली-गलौज पर उतर आते थे। इतना ही नहीं, उन पर बिना किसी कारण के कैदियों के साथ मारपीट करने का भी आरोप है।
इस निलंबन से यह स्पष्ट संदेश गया है कि जेल प्रशासन में किसी भी तरह की लापरवाही या सांठगांठ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभागीय जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।








