Sadhguru Bihar: आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव पहली बार बिहार की धरती पर कदम रखने जा रहे हैं। ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु का यह तीन दिवसीय दौरा राज्य के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें वे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। उनका यह दौरा 28 जून तक चलेगा, जिसकी शुरुआत शुक्रवार को पटना पहुंचने के साथ होगी।
पटना में सद्गुरु का ऐतिहासिक दौरा: मुख्यमंत्री से मुलाकात, बदल रहा बांसघाट श्मशान!
Patna News: आध्यात्मिक गुरु और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव पहली बार पटना पहुंचे हैं। उनका यह तीन दिवसीय दौरा शुक्रवार से शुरू हो गया है, जिसमें बिहार सरकार के साथ बैठकें, एक सार्वजनिक सत्संग और राज्य में फाउंडेशन के कार्यों से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं। 28 जून तक चलने वाले इस दौरे का मुख्य उद्देश्य आध्यात्मिक पहुंच के साथ-साथ बिहार में ईशा फाउंडेशन की नागरिक पहलों को बढ़ावा देना है।






मुख्यमंत्री से मुलाकात और अहम चर्चा
सद्गुरु शुक्रवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे बिहार सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी चर्चा करेंगे। हालांकि, बैठक का एजेंडा आधिकारिक तौर पर जारी नहीं किया गया है, लेकिन उम्मीद है कि इसमें ईशा फाउंडेशन की गतिविधियों और आपसी हित के अन्य मुद्दों पर बात होगी।
यह मुलाकात राज्य में आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यों को लेकर सहयोग की नई संभावनाएं खोल सकती है। बिहार सरकार और ईशा फाउंडेशन के बीच विभिन्न कल्याणकारी परियोजनाओं पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है।
बांसघाट पर ईशा फाउंडेशन का नेक कार्य
सद्गुरु का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब ईशा फाउंडेशन पटना के नव-आधुनिक बांसघाट श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार सेवाओं का प्रबंधन कर रहा है। इस सुविधा में एक निश्चित शुल्क पर अंतिम संस्कार के सभी प्रमुख घटक शामिल हैं, जिसमें पुजारी, नाई और डोम राजा की सेवाएं भी उपलब्ध हैं। फाउंडेशन से जुड़े प्रशिक्षित स्वयंसेवक अंतिम संस्कार में सहायता प्रदान कर रहे हैं।
ईशा फाउंडेशन के अनुसार, श्मशान घाट पर सेवा दे रहे कई स्वयंसेवक इस पहल का समर्थन करने के लिए तमिलनाडु से यहां आए हैं। यह कार्य दिवंगत आत्माओं को सम्मानजनक विदाई देने और शोक संतप्त परिवारों को सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस बांसघाट श्मशान
4.5 एकड़ में फैला बांसघाट श्मशान घाट आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ पुनर्विकसित किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह एशिया की सबसे बड़ी श्मशान सुविधाओं में से एक है और पूर्वी भारत में ऐसी सुविधाओं वाला पहला है। परिसर में एक साथ 18 शवों का अंतिम संस्कार करने की क्षमता है।
- शोक संतप्त परिवारों के लिए दो वातानुकूलित प्रतीक्षा गृह।
- पीने के पानी की सुविधा और आधुनिक स्वच्छता व्यवस्था।
- काल भैरव की आठ फुट की प्रतिमा स्थापित करने और एक समर्पित काल भैरव मंडपम बनाने की योजना, जहां अंतिम संस्कार से पहले के अनुष्ठान किए जा सकें।
- दो तालाब जिनमें गंगाजल भरा गया है, ताकि अनुष्ठानिक स्नान और अस्थि विसर्जन की सुविधा मिल सके, क्योंकि गंगा का मुख्य प्रवाह अब श्मशान घाट से कई किलोमीटर दूर चला गया है।
अधिकारियों का कहना है कि इस उन्नत सुविधा का उद्देश्य अंतिम संस्कार करने वाले परिवारों के लिए अधिक व्यवस्थित, सम्मानजनक और सुलभ वातावरण प्रदान करना है। सद्गुरु 27 जून को गांधी मैदान के पास बापू सभागार में जनता के साथ सत्संग करेंगे और 28 जून को तमिलनाडु लौट जाएंगे।
सद्गुरु का यह दौरा बिहार में आध्यात्मिक चेतना जगाने और नागरिक सेवाओं में सुधार की दिशा में ईशा फाउंडेशन के प्रयासों को नई गति देने वाला माना जा रहा है। इस यात्रा से राज्य में सामाजिक और आध्यात्मिक कार्यों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
सद्गुरु अपने प्रवास के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों से भेंट करेंगे। इस दौरान कृषि, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा में सुधार, युवा विकास और आध्यात्मिकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। यह मुलाकात राज्य के विकास में ईशा फाउंडेशन के सहयोग की नई संभावनाएं खोलेगी।
सीएम सम्राट चौधरी से होगी अहम मुलाकात
27 जून को सद्गुरु गांधी मैदान के पास स्थित बापू सभागार में एक विशाल जनसंवाद कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में हजारों लोगों के जुटने की उम्मीद है, जहां सद्गुरु उन्हें संबोधित करेंगे और सीधे जनता के सवालों का जवाब देंगे। यह आयोजन आम जनता के लिए खुला रहेगा, जिससे उन्हें सद्गुरु के विचारों और मार्गदर्शन का सीधा लाभ मिल सकेगा।
ईशा फाउंडेशन बिहार में पहले से ही विभिन्न सामाजिक और पर्यावरणीय परियोजनाओं में सक्रिय है। सद्गुरु की इस यात्रा के दौरान राज्य सरकार के साथ सहयोग को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य बिहार के युवाओं को आध्यात्मिक और पर्यावरणीय जागरूकता से जोड़ना है, ताकि वे एक बेहतर भविष्य के निर्माण में अपना योगदान दे सकें।
बांसघाट में आधुनिक शवदाह गृह का निरीक्षण
अपने बिहार प्रवास के दौरान सद्गुरु बांसघाट स्थित आधुनिक शवदाह गृह का भी निरीक्षण कर सकते हैं। इस परियोजना को ईशा फाउंडेशन के सहयोग से विकसित किया गया है। फाउंडेशन ने यहां अंतिम संस्कार की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और सम्मानजनक बनाने के उद्देश्य से कई नई सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।
बांसघाट को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। यहां लगभग आठ फीट ऊंची काल भैरव की प्रतिमा स्थापित की जा रही है और काल भैरव मंडप का भी निर्माण कराया जाना है। यह पहल अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को गरिमापूर्ण बनाने और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 28 जून को विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद सद्गुरु तमिलनाडु के लिए रवाना हो जाएंगे।








