Darbhanga DMCH: बिहार के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक दरभंगा डीएमसीएच में शुक्रवार को अचानक निरीक्षण से हड़कंप मच गया। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्रा और उपाधीक्षक डॉ. अमित कुमार झा ने इमरजेंसी विभाग और मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर (एमसीएच) का औचक दौरा किया। इस दौरान दो चिकित्सक अपनी ड्यूटी से नदारद पाए गए, जिसके बाद उन पर तुरंत कार्रवाई की गई।
अचानक हुए इस निरीक्षण के बाद अधीक्षक और उपाधीक्षक कई घंटों तक इमरजेंसी विभाग में डटे रहे और व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे। इस कार्रवाई से अस्पताल प्रशासन ने साफ संदेश दिया कि मरीजों की सुविधाओं से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।






लापरवाही पर तत्काल कार्रवाई, डॉक्टर को बुलाया अस्पताल
उपाधीक्षक डॉ. अमित कुमार झा ने इस औचक निरीक्षण के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी के ऑर्थोपेडिक विभाग में डॉ. शशि कुमार अपनी ड्यूटी पर अनुपस्थित मिले। उन्हें तत्काल फोन कर अस्पताल बुलाया गया। यह कार्रवाई मरीजों को समय पर इलाज सुनिश्चित करने के लिए की गई।
डॉ. झा ने आगे बताया कि मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर के एनआईसीयू में भी दो डॉक्टर गैरहाजिर पाए गए। इस तरह कुल दो चिकित्सकों को ड्यूटी से गायब पाया गया, जिनकी लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया गया है।
डॉ. अमित कुमार झा ने बताया, “निरीक्षण के दौरान इमरजेंसी के ऑर्थोपेडिक विभाग में डॉ. शशि कुमार ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए। उन्हें तत्काल फोन कर अस्पताल बुलाया गया। मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर के एनआईसीयू में भी दो डॉक्टर अनुपस्थित मिले। अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए नियमित रूप से निरीक्षण किया जा रहा है। ड्यूटी में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सारे आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।”
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए नियमित निरीक्षण
निरीक्षण के दौरान एक चिकित्सक ने अपने चेंबर में पेयजल की समस्या का मुद्दा उठाया, जिसे तुरंत दूर कर दिया गया। उपाधीक्षक ने स्पष्ट किया कि अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए नियमित रूप से निरीक्षण किए जा रहे हैं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि ड्यूटी में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डीएमसीएच प्रशासन का कहना है कि मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इस औचक निरीक्षण से अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया गया है।








