Bihar Jamabandi: बिहार में जमीन के मालिकाना हक को लेकर पटना हाईकोर्ट ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि सालों से जारी लगान रसीद को अचानक रोकना या किसी की जमाबंदी को रद्द कर देना पूरी तरह से गैरकानूनी और अवैध है। इस निर्णय से राज्य के लाखों जमीन मालिकों को बड़ी राहत मिलने वाली है, जो अक्सर प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी का शिकार होते रहे हैं।
मामला क्या था? जमुई के गोयनका की याचिका
जस्टिस सौरेंद्र पांडेय की एकलपीठ ने यह महत्वपूर्ण आदेश जमुई निवासी कृष्ण कुमार गोयनका द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में बताया गया था कि गोयनका के पक्ष में पिछले लगभग 60 सालों से लगातार लगान रसीद काटी जा रही थी। हाईकोर्ट ने सरकार से तीखे सवाल पूछे कि आखिर किस आधार पर, बिना किसी सक्षम अदालत के आदेश के, अचानक इस प्रक्रिया को रोक दिया गया और जमाबंदी रद्द करने की कार्रवाई शुरू की गई।






कोर्ट की अवमानना और अफसरों की मनमानी
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जब यह मामला पटना हाईकोर्ट में विचाराधीन था, तभी अंचल अधिकारी (CO) ने जमाबंदी रद्द करने की सिफारिश आगे बढ़ा दी। इतना ही नहीं, अपर समाहर्ता (AC) ने उस सिफारिश के आधार पर कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी। हाईकोर्ट ने इस कदम पर कड़ी नाराजगी जताई और इसे न्यायिक प्रक्रिया में सीधा हस्तक्षेप करार दिया। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि सिर्फ प्रशासनिक कार्यवाही या सरकारी अफसरों की मर्जी के आधार पर किसी की जमाबंदी को खत्म नहीं किया जा सकता।
पटना हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह सिद्धांत साफ किया है कि जब कोई मामला अदालत के सामने लंबित हो, तो कार्यपालिका यानी सरकारी तंत्र ऐसा कोई कदम नहीं उठा सकता जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो। अदालत ने अधिकारियों द्वारा जमाबंदी रद्द करने के लिए की गई पूरी कार्रवाई को अवैध मानते हुए उसे तुरंत निरस्त कर दिया।
सरकारी आपत्ति पर क्या है सही कानूनी रास्ता?
जमीन विवादों पर अपनी नीति स्पष्ट करते हुए पटना हाईकोर्ट ने एक अहम निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि यदि राज्य सरकार या उसके अधिकारियों को किसी नागरिक की जमाबंदी या जमीन के कागजातों पर कोई आपत्ति है, तो उसके लिए एक तय कानूनी रास्ता मौजूद है। सरकार को अपने स्तर पर लगान रसीद रोकने के बजाय सक्षम सिविल कोर्ट में विधिवत केस दायर करना चाहिए और वहीं उस जमाबंदी को चुनौती देनी चाहिए। यह फैसला बिहार में भूमि विवादों के निपटारे के तरीके में एक बड़ा बदलाव लाएगा।
इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद, प्रशासनिक अधिकारी बिना किसी न्यायिक आदेश के किसी भी व्यक्ति की बिहार जमाबंदी को मनमाने ढंग से रद्द नहीं कर पाएंगे। यह लाखों जमीन मालिकों के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करेगा और उन्हें राजस्व अधिकारियों की अनावश्यक परेशानियों से बचाएगा। उम्मीद है कि यह फैसला राज्य में भूमि संबंधी विवादों को हल करने में निष्पक्षता और पारदर्शिता लाएगा।








