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सरकारी ताले पर ‘रुपयों’ का खेल! दरभंगा में सील अल्ट्रासाउंड सेंटर फिर कैसे खुला? अब बोले SDM शशांक – कार्रवाई होगी !

Darbhanga News: कुशेश्वरस्थान पूर्वो में अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों के संचालन पर गहराया विवाद। स्थानीय लोगों ने पीएचसी के चिकित्सा पदाधिकारी पर रिश्वत लेकर ताला खोलने का आरोप लगाया है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

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Darbhanga News: बिहार के दरभंगा जिले में अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों के संचालन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कुशेश्वरस्थान पूर्वो क्षेत्र में स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई केवल दिखावा साबित हो रही है। सबसे चौंकाने वाला मामला उस अल्ट्रासाउंड सेंटर का है, जिसे प्रशासन ने सील कर दिया था, लेकिन अब कथित तौर पर वह फिर से संचालित हो रहा है।

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अधिकारियों का क्या है कहना?

इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं और वे पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपील की गई है।

एसडीएम शशांक राज ने इस संबंध में कहा, ‘मामला मेरे संज्ञान में आया है। इसकी जांच कराई जाएगी।’

वहीं, सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार ने भी आश्वासन दिया, ‘पूरे मामले की जानकारी ली जाएगी। चिकित्सा पदाधिकारी से बात कर जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।’

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यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल भ्रष्टाचार का मामला होगा, बल्कि बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता और नियामक ढांचे पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाएगा। अब देखना होगा कि जांच के बाद इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

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स्थानीय लोगों का कहना है , जांच के दौरान केंद्रों पर सरकारी ताला तो लगवाते हैं, लेकिन बाद में मोटी रकम लेकर वही ताला खुलवा देते हैं। इस पूरे प्रकरण ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

सरकारी ताला, फिर भी जांच जारी, उठे सवाल : अल्ट्रासाउंड सेंटर पर विगत सप्ताह प्रशासन की ओर से कार्रवाई करते हुए सरकारी ताला लगाया गया था। इसके बावजूद, अब इस केंद्र के भीतर लगातार अल्ट्रासाउंड जांच किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। यह स्थिति कई बड़े सवाल खड़े करती है कि यदि केंद्र पर सरकारी ताला लगा था, तो वह खुला कैसे? यदि ताला प्रशासन की निगरानी में था, तो उसकी चाबी किसके पास थी और किसके आदेश पर यह केंद्र दोबारा संचालित होने लगा?

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18 जून को चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा बंद किए गए अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच रिपोर्ट 26 जून को सामने आई। इसके बाद बंद पड़े अन्य अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों के बीच यह चर्चा आम हो गई कि:

अगर मैं भी रुपिया दे देता तो आज मेरा अल्ट्रासाउंड भी खुल जाता?

यह टिप्पणी आरोपों को और बल देती है कि यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित भ्रष्टाचार का मामला हो सकता है।

चिकित्सा पदाधिकारी पर ‘महीने’ के गंभीर आरोप, स्वास्थ्य विभाग पर आंच

क्षेत्र में कई अल्ट्रासाउंड और अवैध जांच घर केंद्र खुलेआम संचालित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन केंद्र संचालकों से कथित तौर पर ‘महीना’ मिलता है, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। वहीं, जिन केंद्रों से ‘महीना’ नहीं मिलता, उन पर छापेमारी और ताला लगाने की कार्रवाई की जाती है। इन आरोपों के कारण स्वास्थ्य विभाग की पूरी कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। लोगों का कहना है कि यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं होगा, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था और कानून के शासन पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाएगा।

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अधिकारियों का आश्वासन: निष्पक्ष जांच की मांग तेज

इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं और पारदर्शी जांच की मांग तेज हो गई है। उन्होंने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

इस संबंध में एसडीएम शशांक राज ने कहा,

मामला मेरे संज्ञान में आया है. इसकी जांच कराई जाएगी.

वहीं, सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार ने भी मामले की गंभीरता को समझते हुए कहा,

पूरे मामले की जानकारी ली जाएगी. चिकित्सा पदाधिकारी से बात कर जांच कराई जाएगी. जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

अब देखना यह होगा कि इन आश्वासनों के बाद इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई होती है और क्या दरभंगा में अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर चल रहे ‘सरकारी ताले’ के खेल का सच सामने आ पाता है।

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