आरा: भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में कथित पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत तिवारी के परिवार की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। परिजनों ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों से देर रात बिना नंबर प्लेट की एक संदिग्ध कार उनके घर के बाहर चक्कर लगा रही है और परिवार की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए घर के बाहर 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था तैनात कर दी है।
मां ने लिखित शिकायत देकर जताई सुरक्षा की मांग
भरत तिवारी की मां आशा देवी ने जगदीशपुर डीएसपी पंकज कुमार मिश्रा को लिखित आवेदन सौंपकर आरोप लगाया कि रात के समय बिना नंबर प्लेट की कार लगातार घर के बाहर मंडरा रही है। उनका कहना है कि इस वजह से पूरा परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जी रहा है तथा किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी हुई है।






डीएसपी ने बढ़ाई सुरक्षा, जांच शुरू
शिकायत के बाद डीएसपी पंकज कुमार मिश्रा स्वयं बिलौटी गांव पहुंचे और परिवार से मुलाकात की। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए भरत तिवारी के घर और आसपास सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए।
पुलिस के अनुसार, एक पुलिस पदाधिकारी, सशस्त्र जवान और चौकीदार सहित कुल पांच पुलिसकर्मियों की टीम को 24 घंटे सुरक्षा ड्यूटी पर लगाया गया है। डीएसपी ने कहा कि परिवार का आवेदन प्राप्त हो गया है और सभी आरोपों की जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
नेपाल से पैदल पहुंचे युवक ने जताया समर्थन
इसी बीच नेपाल से पैदल बिलौटी गांव पहुंचे नीतीश यादव ने भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जताते हुए भावुक प्रतिक्रिया दी।
मंत्री अशोक चौधरी ने परिवार से की मुलाकात
रविवार को बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी भी बिलौटी गांव पहुंचे और मृतक के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान भरत तिवारी के भाई ने दावा किया कि भरत को कुल पांच गोलियां लगी थीं—तीन घटनास्थल पर और दो वाहन के अंदर। उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी विसंगतियों का आरोप लगाया और कहा कि भरत आत्मसमर्पण के लिए तैयार था, फिर भी उसे गोली मार दी गई।
भरत की मां आशा देवी ने मंत्री से कहा कि विस्थापितों और गरीबों के मुद्दे उठाने के कारण उनके बेटे को लगातार प्रशासनिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।
परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता
मंत्री अशोक चौधरी ने महावीर चौधरी फाउंडेशन की ओर से मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी को 5 लाख रुपये का सहायता चेक सौंपा। उन्होंने कहा कि यह सहयोग परिवार की आर्थिक मदद और भरत तिवारी के अधूरे सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाने की भावना से दिया गया है।
फंड में गड़बड़ी और गायब मोबाइल पर उठे सवाल
परिजनों ने आरोप लगाया कि भरत तिवारी विस्थापितों के लिए आए कथित फंड में गड़बड़ी से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की तैयारी कर रहे थे। उनका दावा है कि भरत के मोबाइल फोन में एसडीएम से जुड़े कथित लेन-देन और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां थीं, लेकिन घटना के बाद से मोबाइल गायब है।
परिवार ने मोबाइल की बरामदगी, उसकी फोरेंसिक जांच और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
जांच जारी
फिलहाल पुलिस ने परिवार की सुरक्षा बढ़ा दी है और रेकी, गायब मोबाइल तथा परिवार द्वारा लगाए गए अन्य आरोपों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।








