Bihar Township: सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली बिहार सरकार राज्य में सुनियोजित शहरी विकास की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। सरकार ने बिहार के चार ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप में जमीन की खरीद-बिक्री और नए निर्माण पर 30 जून 2027 तक के लिए पूरी तरह रोक लगा दी है। यह फैसला भागलपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा और सीतामढ़ी में बनने वाले इन टाउनशिप के योजनाबद्ध विकास को सुनिश्चित करेगा।
नगर विकास विभाग ने हाल ही में 4 जुलाई को इस संबंध में एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस प्रतिबंध की अवधि के दौरान यदि जमीन की किसी भी प्रकार की खरीद-फरोख्त या नए निर्माण का प्रयास किया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।






बिहार के इन 4 शहरों में जमीन खरीद-बिक्री पर लगा प्रतिबंध
नगर विकास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा और सीतामढ़ी में प्रस्तावित चार ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के अधिसूचित क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री, जमीन का हस्तांतरण, भूमि का विकास और भवन निर्माण से संबंधित किसी भी प्रकार के कार्य पर 30 जून 2027 तक रोक रहेगी। इस निर्णय के बाद अब इन चारों टाउनशिप के मास्टर प्लान बनाने का काम तेजी से शुरू हो सकेगा।
प्रतिबंधित क्षेत्रों में नियम का उल्लंघन करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यह कार्यवाही शहरी आयोजना तथा विकास अधिनियम, 2012 की धारा 9(7) तथा बिहार शहरी आयोजना तथा विकास नियमावली, 2014 के तहत की गई है। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य इन टाउनशिप क्षेत्रों का योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित करना और भविष्य की शहरी जरूरतों के अनुरूप आधारभूत संरचना विकसित करना है।
सरकार की इस पहल से कुल 12 टाउनशिप विकसित करने की योजना को बल मिलेगा, जिनमें डेहरी भी शामिल है।
पहले भी कई शहरों में लगी थी रोक, जानें पूरा मामला
यह पहली बार नहीं है जब बिहार सरकार ने टाउनशिप विकास के लिए जमीन खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध लगाया है। इससे पहले 23 अप्रैल को भी राज्य सरकार ने 11 टाउनशिप में जमीन के क्रय-विक्रय पर रोक लगाई थी। इसके बाद 24 अप्रैल को पटना, सोनपुर, गयाजी, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर सहित सात शहरों में 31 मार्च 2027 तक के लिए इसी तरह का आदेश जारी किया गया था।
इन प्रतिबंधों के बाद जमीन मालिकों ने आर्थिक जरूरतों का हवाला देते हुए जमीन बेचने की अनुमति मांगी थी। इस पर सरकार ने जून 2026 में उन्हें राहत देते हुए आवास बोर्ड को जमीन खरीदने के लिए अधिकृत किया। इच्छुक किसान आवास बोर्ड मुख्यालय पटना में एमडी के नाम से अपनी जमीन बेचने के लिए आवेदन दे सकते हैं। दस्तावेजों की जांच के बाद संबंधित जिलाधिकारी जमीन का उचित मूल्य तय करेंगे। यह प्रक्रिया किसानों को अपनी संपत्ति का सही मूल्य प्राप्त करने में मदद करेगी, जबकि सरकार को योजनाबद्ध विकास के लिए आवश्यक भूमि भी उपलब्ध हो सकेगी।








