Bihar Politics: बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव ने हलचल मचा दी है। इस एक सीट को लेकर महागठबंधन के भीतर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं, जिससे गठबंधन की एकता पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। दोनों प्रमुख दल इस सीट पर अपना-अपना दावा ठोक रहे हैं, जिसने चुनावी रण को और भी दिलचस्प बना दिया है।
बिहार: बांकीपुर उपचुनाव से पहले महागठबंधन में ‘सीट-युद्ध’ शुरू! RJD-कांग्रेस भिड़े
Bihar By-election: बिहार की राजनीति में इन दिनों बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। पटना की इस महत्वपूर्ण सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले ही महागठबंधन के भीतर घमासान शुरू हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस, दोनों ही प्रमुख घटक दलों ने इस सीट पर अपनी-अपनी दावेदारी पेश कर दी है, जिससे गठबंधन के भीतर तकरार बढ़ गई है।






RJD का दावा: ‘हम सबसे मजबूत, उम्मीदवार हमारा ही होगा’
राष्ट्रीय जनता दल ने बांकीपुर सीट पर सबसे पहले अपनी दावेदारी ठोंकी है। RJD के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने इस संबंध में एक बड़ा बयान जारी किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी बांकीपुर सीट से अपना उम्मीदवार उतारेगी। मृत्युंजय तिवारी ने अपने दावे के समर्थन में तर्क दिया कि साल 2025 के विधानसभा चुनाव में भी राजद ने इस सीट से अपना प्रत्याशी खड़ा किया था।
मृत्युंजय तिवारी ने कहा, ‘राजद सबसे मजबूत और ताकतवर पार्टी है। इसलिए बांकीपुर में राजद का उम्मीदवार होगा, इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।’
राजद का यह सीधा दावा कांग्रेस को नागवार गुजरा है और उसने तत्काल इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
कांग्रेस का पलटवार: ‘बांकीपुर हमारी पारंपरिक सीट, गठबंधन धर्म का पालन हो’
राजद के दावे पर कांग्रेस ने तुरंत तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने राजद के बयान पर सवाल उठाते हुए बांकीपुर सीट पर अपनी पार्टी का मजबूत दावा पेश किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि बांकीपुर हमेशा से कांग्रेस की पारंपरिक सीट रही है।
असित नाथ तिवारी ने कहा, ‘बांकीपुर हमेशा से कांग्रेस की पारंपरिक सीट रही है। इस लिहाज से बांकीपुर पर कांग्रेस का दावा ज्यादा मजबूत है।’
कांग्रेस प्रवक्ता ने गठबंधन के सहयोगियों को नसीहत देते हुए कहा कि अगर कोई दल बिना सहयोगी से बात किए अकेले ही किसी सीट पर दावा करता है, तो वह गठबंधन का हिस्सा नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस ऐसे दलों की बात मानने को बिल्कुल भी मजबूर नहीं है। यह बयान महागठबंधन के भीतर गहरे मतभेद की ओर इशारा करता है।
त्रिकोणीय मुकाबले की ओर बांकीपुर, पहले भी रही है तकरार
बांकीपुर सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला होने की उम्मीद है। राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भी इस सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। पहले यह चर्चा थी कि प्रशांत किशोर को महागठबंधन का समर्थन मिल सकता है, लेकिन अब महागठबंधन के अंदर ही रार छिड़ गई है।
यह पहली बार नहीं है जब राजद और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर विवाद सामने आया है। इससे पहले साल 2025 के विधानसभा चुनाव में भी दोनों दलों के बीच भारी तकरार देखने को मिली थी। उस समय भी लगभग आधा दर्जन सीटों पर राजद और कांग्रेस ने एक-दूसरे के खिलाफ अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए थे। अब उपचुनाव में भी वही स्थिति दोबारा बनती दिख रही है, जो महागठबंधन की एकजुटता के लिए एक बड़ी चुनौती है।
राजद का दावा: ‘सबसे मजबूत पार्टी’, उम्मीदवार तय
राजद ने बांकीपुर सीट पर सबसे पहले अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है। पार्टी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजद इस सीट से अपना उम्मीदवार उतारेगी। तिवारी ने अपने तर्क में कहा कि साल 2025 के विधानसभा चुनाव में भी राजद ने यहां से अपना प्रत्याशी खड़ा किया था। उन्होंने जोर देकर कहा, ‘राजद सबसे मजबूत और ताकतवर पार्टी है। इसलिए बांकीपुर में राजद का उम्मीदवार होगा, इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।’ यह बयान महागठबंधन के भीतर तनाव बढ़ाने वाला साबित हुआ है।
कांग्रेस का पलटवार: ‘परंपरागत सीट’, नहीं मानेंगे ऐसी बात
राजद के इस दावे पर कांग्रेस ने तुरंत तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने पलटवार करते हुए बांकीपुर सीट पर अपना मजबूत दावा ठोका। तिवारी ने कहा कि बांकीपुर हमेशा से कांग्रेस की पारंपरिक सीट रही है, और इस लिहाज से कांग्रेस का दावा ज्यादा मजबूत है। असित नाथ तिवारी ने सहयोगियों को नसीहत देते हुए साफ किया, ‘अगर कोई दल बिना सहयोगी से बात किए अकेले दावा करता है, तो वह गठबंधन का हिस्सा नहीं हो सकता। कांग्रेस ऐसे दलों की बात मानने को बिल्कुल भी मजबूर नहीं है।’ यह बयान सीधे तौर पर राजद को चुनौती देता है।
प्रशांत किशोर और गठबंधन की पुरानी रार
बांकीपुर सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है, क्योंकि प्रशांत किशोर ने भी यहां से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। पहले ऐसी चर्चाएं थीं कि प्रशांत किशोर को महागठबंधन का समर्थन मिल सकता है, लेकिन अब गठबंधन के अंदरूनी कलह ने समीकरण बदल दिए हैं। यह पहली बार नहीं है जब राजद और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर विवाद गहराया है। साल 2025 के विधानसभा चुनाव में भी दोनों दलों के बीच भारी तकरार देखने को मिली थी, जब लगभग आधा दर्जन सीटों पर राजद और कांग्रेस ने एक-दूसरे के खिलाफ अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। उपचुनाव में भी वही स्थिति एक बार फिर बनती दिख रही है, जो बिहार में महागठबंधन के लिए चिंता का विषय है।
बांकीपुर उपचुनाव अब सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह महागठबंधन की एकजुटता की भी अग्निपरीक्षा बन गया है। राजद और कांग्रेस के बीच सुलह न होने की स्थिति में, इसका सीधा फायदा विरोधियों को मिल सकता है और इसका असर आने वाले बड़े चुनावों पर भी पड़ सकता है।








