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Darbhanga LNMU से निकला नव विज्ञान, खेती का भविष्य बदलेंगे ये ‘छोटे जीव’! बिहार के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी | जानिए – खेती को कैसे बचा रहे ‘सीड एंडोफाइट्स’

Bihar Agriculture: दरभंगा में आयोजित व्याख्यान में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ ने बताया, कैसे रासायनिक उर्वरकों से हो रहे नुकसान को कम कर सकते हैं ये छोटे जीव, किसानों के लिए बड़ी खबर।

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Bihar Agriculture: रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से बिहार की कृषि पर गहरा संकट मंडरा रहा है। इसी बीच, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा में आयोजित एक महत्वपूर्ण व्याख्यान में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सतीश कुमार वर्मा ने ‘पादप सूक्ष्मजीव समुदाय’ (प्लांट माइक्रोबायोटा) को टिकाऊ खेती का आधार बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये सूक्ष्मजीव फसलों के सतत विकास और संरक्षण की आधारशिला हैं।

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इस कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय वनस्पति विज्ञान विभाग ने माइक्रो बायोलॉजिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया के सहयोग से किया था। डॉ. वर्मा ने अपने व्याख्यान में पौधों के विकास और रोग प्रतिरोधक क्षमता में सूक्ष्मजीवों की अहम भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी, जो भविष्य में बिहार की कृषि को नई दिशा दे सकती है।

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खेती को बचा रहे ‘सीड एंडोफाइट्स’

डॉ. सतीश कुमार वर्मा ने बताया कि बीजों में प्राकृतिक रूप से मौजूद ‘सीड एंडोफाइट्स’ पौधों के विकास, पोषण और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि रासायनिक खादों और रसायनों के अंधाधुंध उपयोग से पौधों के प्राकृतिक माइक्रोबायोटा में लगातार कमी आ रही है, जिससे पूरा कृषि पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है।

डॉ. सतीश कुमार वर्मा ने कहा, ‘बीजों में उपस्थित लाभकारी एंडोफाइट्स अंकुरण के प्रारंभिक चरण में पौधों को विभिन्न रोगजनकों से सुरक्षा प्रदान करते हैं तथा स्वस्थ पौध विकास सुनिश्चित करते हैं।’

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उनके शोध निष्कर्षों के अनुसार, ब्राउनटॉप मिलेट, धान और मक्का जैसी प्रमुख फसलों के बीजों में पाए जाने वाले जीवाणु एंडोफाइट्स न केवल पौधों की शुरुआती वृद्धि को नियंत्रित करते हैं, बल्कि आवश्यक पोषक तत्व भी उपलब्ध कराते हैं और रोगजनकों के प्रभाव को कम करने में भी सक्षम हैं।

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बिहार में सूक्ष्मजीव विज्ञान को मिलेगा बढ़ावा

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत और परिचय के साथ हुआ। विश्वविद्यालय वनस्पति विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक और माइक्रोबायोलॉजिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया के राज्य समन्वयक डॉ. अंकित कुमार सिंह ने मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए उनके अकादमिक और शोध योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे वैज्ञानिक व्याख्यान छात्रों और शोधकर्ताओं को नए अनुसंधानों से जोड़ने में बेहद उपयोगी होते हैं।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. सबिता वर्मा ने की। डॉ. अंकित कुमार सिंह ने माइक्रो बायोलॉजिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रो. देशमुख और प्रदेश अध्यक्ष प्रो. रिमझिम शील के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि बिहार में सूक्ष्मजीव विज्ञान और अंतःविषयक शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।

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टिकाऊ कृषि व्यवस्था की ओर एक कदम

डॉ. वर्मा ने भविष्य की टिकाऊ और जैविक कृषि व्यवस्था के लिए इन लाभकारी सूक्ष्मजीवों पर आधारित अनुसंधान और तकनीकों को बढ़ावा देने को समय की मांग बताया। उनके अनुसार, यह न केवल पर्यावरण को बचाएगा बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक होगा।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व परीक्षा नियंत्रक डॉ. आनंद मोहन मिश्र ने मुख्य वक्ता, अध्यक्ष, सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजन समिति का धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय वनस्पति विज्ञान विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. शहनाज़ जमील, एसोसिएट प्रोफेसर-सह-सीसीडीसी डॉ. गजेंद्र प्रसाद सहित शोधार्थी गोविंद कुमार, मोहन कुमार, काजल कुमारी, विकास कुमार, अर्जुन कुमार मेहरा, विक्की कुमार महतो और अनेक विद्यार्थी उपस्थित थे। प्रतिभागियों ने इस आयोजन को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताते हुए ऐसे वैज्ञानिक व्याख्यानों के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया। आईटी सेल के राजेश कुमार ने कार्यक्रम में तकनीकी सहयोग प्रदान किया।

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