Darbhanga POCSO: बिहार के दरभंगा में पॉक्सो कोर्ट ने एक 13 वर्षीय नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के जघन्य अपराध में दोषी को ताउम्र कैद की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश सुलेखा झा की अदालत ने पैगम्बरपुर गांव के विवेक कुमार शर्मा को आजीवन सश्रम कारावास और एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। इस फैसले से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को बड़ी राहत मिली है।







अदालत ने पीड़िता को ‘बिहार पीड़ित प्रतिकर योजना’ के तहत 6 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। इस कठोर निर्णय ने समाज में एक कड़ा संदेश दिया है कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
विवेक शर्मा ने नाबालिग को बनाया था बंधक
अभियोजन पक्ष का संचालन कर रहे प्रभारी स्पेशल पीपी अमर प्रकाश ने अदालत को बताया कि सिंहवाड़ा थानाक्षेत्र के पैगम्बरपुर गांव निवासी गौतम शर्मा के पुत्र विवेक कुमार शर्मा ने एक नाबालिग लड़की को जबरन बंधक बना लिया था। दुष्कर्म के दौरान उसने लड़की के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया ताकि वह शोर न मचा सके, जिससे पीड़िता बेहोश हो गई थी।
यह घटना इतनी भयानक थी कि अगले दिन जब पीड़िता के कराहने की आवाज सुनकर लोग पहुंचे और उसे पानी पिलाकर होश में लाए, तब इस हैवानियत का खुलासा हुआ। इस मामले में 21 सितंबर 2022 को एक थाने में कांड संख्या 201/22 दर्ज की गई थी।
अदालत ने विभिन्न धाराओं में सुनाई सजा
पुलिस ने नामजद अभियुक्त विवेक कुमार शर्मा को तत्काल गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। अनुसंधान पूरा होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोपपत्र समर्पित किया, और इस मामले का विचारण जीआर नं. 147/22 के तहत शुरू हुआ। गुरुवार को सजा निर्धारण के बिंदु पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने इसे एक गंभीर सामाजिक अपराध बताते हुए दोषी के लिए अधिकतम सजा की मांग की।
बचाव पक्ष ने आरोपी की कम उम्र का हवाला देते हुए न्यूनतम सजा देने की गुहार लगाई। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस और अभिलेख पर मौजूद साक्ष्यों का गहन परिशीलन करने के बाद विवेक कुमार शर्मा को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत ताउम्र कैद (आजीवन सश्रम कारावास) और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त, धारा 4 पॉक्सो एक्ट में 25 वर्षों का सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
पीड़िता को मिलेगा 6 लाख रुपये मुआवजा
भारतीय दंड संहिता (भादवि) की धारा 341 में एक माह का कारावास और धारा 342 में 6 माह की सजा भी सुनाई गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। यदि दोषी अर्थदंड जमा नहीं करता है, तो उसे 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने बताया कि सभी एपीपी और स्पेशल पीपी पूरी मुस्तैदी से अभियोजन पक्ष को अदालत में पेश करते हैं, जिसका परिणाम है कि पॉक्सो कोर्ट ने दुष्कर्मी को जीवन भर के लिए कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला दुष्कर्म जैसे अपराधों के खिलाफ न्यायपालिका की दृढ़ता को दर्शाता है और भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने में सहायक सिद्ध होगा।









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