Darbhanga Heritage: बिहार के दरभंगा में स्थित लालबाग का राष्ट्रीय विद्यालय अब राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किया जाएगा। यह ऐतिहासिक विद्यालय असहयोग आंदोलन से जुड़ा है, जिसकी पहचान एक महत्वपूर्ण धरोहर के रूप में है। बिहार सरकार ने इस भवन को राज्य संरक्षित स्मारक का दर्जा देने की पहल की है, जिसके लिए पुरातत्व विभाग ने सभी आवश्यक औपचारिकताओं को तेजी से पूरा करना शुरू कर दिया है।
स्थानीय सांसद और लोकसभा में भाजपा सचेतक डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने इस महत्वपूर्ण घोषणा की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की थी। सांसद ठाकुर ने मुख्यमंत्री को विद्यालय भवन की ऐतिहासिक महत्ता से अवगत कराया और इसे राज्य संरक्षित स्मारक घोषित करने का आग्रह किया था। उनके इस आग्रह के बाद अब सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।






मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहल, सांसद गोपाल जी ठाकुर का आग्रह
डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक पत्र भी सौंपा था, जिसमें लालबाग स्थित राष्ट्रीय विद्यालय के ऐतिहासिक महत्व का विस्तृत वर्णन था। मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। पुरातत्व विभाग के निदेशक ने एक पत्र के माध्यम से सूचित किया है कि लालबाग मोहल्ला के राष्ट्रीय विद्यालय के भवन को ‘बिहार प्राचीन स्मारक और पुरास्थल अवशेष तथा कलानिधि अधिनियम, 1976’ के प्रावधानों के तहत संरक्षित घोषित करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने बताया, “मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी की पहल से दरभंगा के सभी प्राचीन विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों का कायाकल्प किया जाएगा। लालबाग स्थित राष्ट्रीय विद्यालय भवन पुरातत्व विभाग से राष्ट्रीय संरक्षण स्मारक के रूप में शीघ्र शामिल होगी।”
‘बिहार प्राचीन स्मारक अधिनियम’ के तहत संरक्षण प्रक्रिया शुरू
इस अधिनियम के तहत किसी भी स्थल या भवन को संरक्षित स्मारक घोषित करने से उसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को कानूनी सुरक्षा मिलती है। पुरातत्व विभाग की टीम जल्द ही स्थल का निरीक्षण कर आवश्यक दस्तावेज और सर्वेक्षण संबंधी कार्य पूरा करेगी। यह कदम न केवल राष्ट्रीय विद्यालय की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इसके महत्व को भी स्थापित करेगा।
मिथिला की प्राचीन धरोहरों को भी मिलेगा नया जीवन
सांसद डॉ. ठाकुर ने केवल राष्ट्रीय विद्यालय तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी थी। उन्होंने राजकिला, शहर के तीनों ऐतिहासिक तालाबों को डेस्टिनेशन सेंटर के रूप में विकसित करने और मिथिला की प्राचीन पांडुलिपियों का पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षण करने का भी आग्रह किया था। इसके अतिरिक्त, उन्होंने दरभंगा और मिथिला क्षेत्र की अन्य ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों को पुनर्जीवित कर उन्हें राष्ट्रीय फलक पर स्थापित करने के लिए बिहार सरकार और भारत सरकार से पहल करने का अनुरोध किया था। इन सभी प्रयासों के भी सकारात्मक परिणाम अब दिखने लगे हैं।
यह निर्णय दरभंगा के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परिदृश्य के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। लालबाग का राष्ट्रीय विद्यालय, जो असहयोग आंदोलन के दौरान स्थापित हुआ था, अब एक संरक्षित स्मारक के रूप में अपनी गौरवशाली विरासत को अक्षुण्ण रखेगा, जिससे क्षेत्र की पहचान और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।









