Patna Fire Safety: पटना शहर में पिछले महीने दीदारगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद पटना अग्निशमन सेवा विभाग ने अग्नि सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने बीते 10 दिनों में 200 से अधिक प्रतिष्ठानों का गहन निरीक्षण किया है और जहां भी सुरक्षा मानकों में कमी पाई गई है, वहां तुरंत नोटिस जारी किए गए हैं। यह कार्रवाई शहर में अग्नि सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से की जा रही है।
अग्निशमन विभाग की बड़ी कार्रवाई: किन प्रतिष्ठानों पर गिरी गाज?
अग्निशमन विभाग के अनुसार, यह सघन जांच अभियान 28 जून की रात दीदारगंज थाना क्षेत्र के करमालीचक स्थित महुली रोड पर एक सब्जी और खाद्य तेल के गोदाम में लगी आग के बाद शुरू किया गया है। स्टेशन फायर ऑफिसर अजय शर्मा ने बताया कि ऑडिट में अस्पताल, क्लीनिक, डायग्नोस्टिक सेंटर, गोदाम, मैरिज हॉल, कोचिंग संस्थान, लाइब्रेरी, लॉज, शॉपिंग मॉल, रेस्तरां, होटल, फैक्ट्रियां और बहुमंजिली इमारतें शामिल थीं। उन्होंने यह भी बताया कि कई प्रतिष्ठानों में उनके परिसर के आकार और प्रकृति के बावजूद केवल एक या दो अग्निशामक यंत्र ही पाए गए।






अधिकारियों ने यह भी पाया कि कई इमारतों में सुरक्षा मानदंडों के तहत आवश्यक अलग प्रवेश और निकास मार्ग नहीं थे। अग्निशमन विभाग ने संबंधित प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी कर इन कमियों को दूर करने का निर्देश दिया है।

15 दिन में सुधार नहीं तो होगी सख्त कार्रवाई
फायर ऑफिसर के मुताबिक, जारी किए गए नोटिस में भवन के प्रकार, ऊंचाई और आकार के आधार पर सात से पंद्रह दिनों की अनुपालन अवधि दी गई है। इस अवधि के दौरान मालिकों को आवश्यक अग्नि सुरक्षा बुनियादी ढांचे को स्थापित या अपग्रेड करने के लिए कहा गया है, जिसमें शामिल हैं:
- पानी के भंडारण टैंक
- अग्निशमन पाइपलाइन
- आग बुझाने के उपकरण
- लागू मानदंडों के तहत आवश्यक अन्य सुरक्षा प्रणालियाँ
अधिकारियों ने कहा कि समय सीमा समाप्त होने के बाद अनुवर्ती निरीक्षण किए जाएंगे। यदि कमियों को दूर नहीं किया जाता है, तो मामले को आगे की कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों के पास भेजा जाएगा।
इन इलाकों में हुई सघन जांच
अग्निशमन विभाग के अनुसार, सिटी सब-डिवीजन के कई क्षेत्रों में ऑडिट किए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- महेंद्रू
- सुल्तानगंज
- चौधरी टोला
- सैदपुर
- रामपुर
- भूतनाथ रोड
- अशोक राजपथ
- त्रिपोलिया
- आलमगंज
- बेलवरगंज
- फतुहा
- खुसरूपुर
- पहाड़ी
- बाजार समिति
- बैरियर
- गौरीचक
- करमालीचक
- दीदारगंज
- बाईपास क्षेत्र
अधिकारियों ने बताया कि शहर के अन्य हिस्सों में भी निरीक्षण जारी हैं।
अग्नि सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
अग्निशमन विभाग अग्नि निवारण पर जन जागरूकता अभियान भी चला रहा है और फायर अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के आवेदनों पर भी कार्रवाई कर रहा है। शर्मा ने बताया कि निरीक्षण के दौरान अधिकारी भवन मालिकों को बिजली के तारों और उपकरणों का नियमित रूप से निरीक्षण करने तथा आवश्यक अग्नि सुरक्षा प्रणालियों को स्थापित करने की सलाह दे रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:
- फायर अलार्म सिस्टम
- स्मोक डिटेक्टर
- फायर होज़ रील
- रेत और पानी की बाल्टियाँ
- ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम
- हाइड्रेंट सिस्टम
- आपातकालीन निकास
- आपातकालीन रोशनी
विभाग ने बड़े भवनों में जनरेटर बैकअप के महत्व पर भी जोर दिया, यह देखते हुए कि हाइड्रेंट सिस्टम से जुड़े बिजली के पंप आग से बिजली गुल होने की स्थिति में निष्क्रिय हो सकते हैं।
फायर NOC: प्रक्रिया और समय-सीमा
अग्निशमन विभाग के अनुसार, जो आवेदक निरीक्षण प्रक्रिया पूरी कर लेते हैं, कमियों को दूर कर लेते हैं और अन्य प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं को पूरा करते हैं, उन्हें सात से दस दिनों के भीतर जिला फायर ऑफिसर से फायर एनओसी मिल सकता है। अधिकारियों ने कहा कि इन निरीक्षणों का उद्देश्य पटना शहर के व्यावसायिक और सार्वजनिक भवनों में तैयारी में सुधार करना और आग के जोखिमों को कम करना है।
पटना अग्निशमन विभाग की यह सघन जांच अभियान शहर के व्यावसायिक और सार्वजनिक भवनों में अग्नि सुरक्षा को लेकर गंभीरता दर्शा रहा है। आने वाले दिनों में इन निरीक्षणों के नतीजों और प्रतिष्ठानों द्वारा की गई कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी, ताकि भविष्य में दीदारगंज जैसी घटनाओं को दोहराया न जा सके और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।









