Patna University Protest: बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में प्रस्तावित निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 के खिलाफ पटना यूनिवर्सिटी में शिक्षकों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। इस आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन से जोड़ने की तैयारी है, जिसके तहत शनिवार को पटना विश्वविद्यालय संघर्ष समिति के बैनर तले हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही, पटना कॉलेज परिसर में सुबह 11:30 बजे से शाम 4 बजे तक एक विशाल मानव श्रृंखला भी बनाई जाएगी। शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
शिक्षकों का आक्रोश: विधेयक के खिलाफ क्यों हैं?
आंदोलनकारी शिक्षकों का आरोप है कि निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2026 का उच्च शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर और व्यापक असर पड़ सकता है। इसी कारण वे सरकार से इस विधेयक पर पुनर्विचार करने और संबंधित पक्षों के साथ व्यापक संवाद स्थापित करने की मांग कर रहे हैं। संघर्ष समिति का कहना है कि उनकी आपत्तियों पर संतोषजनक जवाब न मिलने तक विरोध कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।






आंदोलन की रणनीति: जनसमर्थन जुटाने की पहल
इस बार विरोध प्रदर्शन का केंद्र केवल धरना स्थल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे जनसमर्थन से जोड़ने की रणनीति बनाई गई है। इसी उद्देश्य से हस्ताक्षर अभियान आयोजित किया जा रहा है, ताकि विश्वविद्यालय समुदाय के साथ-साथ आम लोगों की राय भी इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सामने आ सके। संघर्ष समिति ने दावा किया है कि बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी, छात्र और पूर्व छात्र इस अभियान में शामिल होंगे, जिससे आंदोलन को और मजबूती मिलेगी।

पुलिस कार्रवाई और शिक्षकों का संकल्प
आंदोलन के तीसरे दिन भी गतिविधियां तेज रहीं। सुबह करीब 11 बजे पटना विश्वविद्यालय मुख्यालय से लोकभवन तक एक आक्रोश मार्च निकाला गया। हालांकि, पुलिस ने इस मार्च को पटना कॉलेज के पास ही रोक दिया, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे। वे पटना कॉलेज, वाणिज्य महाविद्यालय और दरभंगा हाउस होते हुए वापस धरना स्थल पर पहुंचे और वहां एक सभा का आयोजन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि आंदोलन शुरू होने से पहले ही विश्वविद्यालय परिसर में बैठे दो शिक्षकों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया, जिसे उन्होंने आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास बताया। शिक्षकों ने इस कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराना उनका संवैधानिक अधिकार है और पुलिस की यह कार्रवाई अनुचित है।
शिक्षकों ने साफ कर दिया है कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद उनका संकल्प दृढ़ है और वे अपनी मांगों को मनवाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज करने की तैयारी है, जिसमें विभिन्न शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन भी जुटाया जाएगा। सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच संवाद स्थापित होने तक यह गतिरोध जारी रहने की संभावना है।









