Bihar Child Trafficking: बिहार में नवजात बच्चों की अवैध खरीद-बिक्री करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पटना जिले के धनरूआ थाना क्षेत्र से दो माह की एक मासूम बच्ची को बेचने के सनसनीखेज मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। धनरूआ पुलिस ने रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के सहयोग से जहानाबाद रेलवे स्टेशन पर छापेमारी कर बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया है। इस कार्रवाई के दौरान दो महिलाओं को भी गिरफ्तार किया गया है।
गिरफ्तार महिलाओं की पहचान छत्तीसगढ़ के रायगढ़ निवासी मिता भौमिक और पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना निवासी सुनीता भट्टाचार्य के रूप में हुई है। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में ही इस नेटवर्क के कई राज सामने आए हैं।






आईवीएफ अस्पताल से जुड़ा था नवजात बच्चों की खरीद-बिक्री का नेटवर्क
पुलिस की गहन पूछताछ में दोनों गिरफ्तार महिलाओं ने स्वीकार किया कि वे पहले पटना के एक आईवीएफ (टेस्ट ट्यूब बेबी) अस्पताल से जुड़ी थीं। इसी दौरान उनकी पहचान नवजात बच्चों की अवैध खरीद-बिक्री करने वाले एक बड़े नेटवर्क से हुई। जांच में यह भी पता चला है कि दो माह की मासूम बच्ची को उनके सहयोगियों की मदद से कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में बेच दिया गया था।
पुलिस के दबाव में बच्ची को लेकर लौट रही थीं आरोपी।
पुलिस को पहले से गिरफ्तार एक सहयोगी से महत्वपूर्ण सुराग मिले थे, जिसके आधार पर लगातार दबिश दी जा रही थी। गिरफ्तारी की आशंका बढ़ने पर दोनों महिलाएं बेंगलुरु से बच्ची को लेकर पटना लौट रही थीं। इसी दौरान धनरूआ पुलिस ने आरपीएफ के साथ मिलकर जहानाबाद रेलवे स्टेशन पर उन्हें बच्ची सहित धर दबोचा।
नौकरी का झांसा देकर मां से अलग की गई थी मासूम
इस पूरे मामले का खुलासा धनरूआ थाना क्षेत्र के पभेड़ा गांव निवासी पूजा कुमारी की प्राथमिकी से हुआ। पूजा ने अपनी शिकायत में बताया था कि 23 जून को उनके ही गांव की एक महिला ने उन्हें नौकरी दिलाने के बहाने पटना बुलाया। बाद में उन्हें राजस्थान के कोटा में काम दिलाने का झांसा दिया गया। इसी दौरान, आरोपी महिला ने पूजा की दो माह की बेटी साधना कुमारी को एक रिश्तेदार के पास रखने का बहाना बनाकर उससे अलग कर दिया। कुछ समय बाद आरोपियों ने पूजा को बताया कि उसकी बच्ची को बेच दिया गया है और अब उसे वापस नहीं लाया जा सकता।
विशेष टीम का गठन, अन्य आरोपियों की तलाश जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए धनरूआ थाना पुलिस ने अवर निरीक्षक नीतू कुमारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया था। इस टीम ने तकनीकी और मानवीय अनुसंधान के आधार पर तेजी से कार्रवाई करते हुए बच्ची को सकुशल बरामद किया और दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि बिहार चाइल्ड ट्रैफिकिंग से जुड़े इस अंतरराज्यीय गिरोह के अन्य आरोपितों की पहचान कर ली गई है। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। इसके साथ ही, पुलिस इस नेटवर्क के अन्य राज्यों और संस्थानों से जुड़े संभावित संबंधों की भी गहनता से जांच कर रही है, ताकि पूरे रैकेट का भंडाफोड़ किया जा सके।








