Delhi Police Bihar: दिल्ली पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए बिहार से दो लापता नाबालिग लड़कियों को सकुशल बरामद कर लिया है। इन किशोरियों को पहाड़गंज और आनंद पर्वत थाना क्षेत्रों से अलग-अलग समय पर अगवा किया गया था। पुलिस की टीम ने लगातार ठिकाने और सिम कार्ड बदल रही इन लड़कियों को ढूंढ निकालने के लिए व्यापक अभियान चलाया।
मध्य जिला पुलिस उपायुक्त रोहित राजवीर सिंह ने इस कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पहला मामला पहाड़गंज थाने से जुड़ा है, जहां छह जुलाई को एक 13 वर्षीय किशोरी घर से लापता हो गई थी। परिजनों की शिकायत पर तुरंत अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।






जांच टीम ने 65 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के साथ ही करीब 140 अनाथालयों, शेल्टर होम, धार्मिक स्थलों और रेड लाइट एरिया में सघन तलाशी अभियान चलाया। पंजाब और बिहार के कई ठिकानों पर भी पुलिस ने दबिश दी, लेकिन शुरुआत में कोई सफलता नहीं मिली।
इसके बाद, एक मोबाइल नंबर के आधार पर तकनीकी निगरानी शुरू की गई। इस नंबर की लोकेशन पहले बिहार के सहरसा और फिर सुपौल में मिली। स्थानीय पुलिस की मदद से अंततः सुपौल के छातापुर से उस किशोरी को सुरक्षित ढूंढ निकाला गया।
सिम बदल रही थीं, ठिकाने छिपा रही थीं… बिहार से ऐसे मिलीं दिल्ली की 2 लापता नाबालिग लड़कियां
Bihar Missing Girls: दिल्ली पुलिस की मध्य जिला एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। यूनिट ने दिल्ली से लापता हुई दो नाबालिग लड़कियों को बिहार से सकुशल बरामद कर लिया है। इन किशोरियों को उनके परिवार वालों को सौंप दिया गया है। ये दोनों लड़कियां पहाड़गंज और आनंद पर्वत थाना क्षेत्रों से अलग-अलग मामलों में लापता हुई थीं और पुलिस से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने और सिम कार्ड बदल रही थीं।
पहला मामला: पहाड़गंज से लापता किशोरी की बिहार में खोज
जिला पुलिस उपायुक्त रोहित राजवीर सिंह ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पहला मामला पहाड़गंज थाना क्षेत्र से जुड़ा है। यहां 6 जुलाई को एक 13 वर्षीय किशोरी अपने घर से लापता हो गई थी। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने तुरंत अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। टीम ने 65 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और लगभग 140 अनाथालयों, शेल्टर होम, धार्मिक स्थलों और रेड लाइट एरिया में बच्ची की तलाश की। इस दौरान पंजाब और बिहार के कई स्थानों पर भी दबिश दी गई, लेकिन शुरुआती दौर में कोई सफलता नहीं मिली।
इसके बाद, पुलिस ने एक मोबाइल नंबर के आधार पर तकनीकी निगरानी शुरू की। किशोरी की लोकेशन पहले बिहार के सहरसा और फिर सुपौल में मिली। स्थानीय पुलिस की मदद से अंततः सुपौल के छातापुर से किशोरी को सुरक्षित ढूंढ निकाला गया।
दूसरा मामला: आनंद पर्वत की किशोरी के लिए 200 KM पीछा
दूसरा मामला आनंद पर्वत थाना क्षेत्र का है, जहां दिसंबर 2025 से लापता एक 15 वर्षीय किशोरी की तलाश चल रही थी। जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि वह मधुबनी जिले के बेनीपट्टी में हो सकती है। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले ही किशोरी वहां से सहरघाट चली गई। पुलिस टीम ने लगभग 200 किलोमीटर तक उसका पीछा किया और ग्राम मुखिया व स्थानीय पुलिस की सहायता से उसे भी सकुशल बरामद कर लिया।
पुलिस को चकमा देने की कोशिश, तकनीक से मिली सफलता
रोहित राजवीर सिंह ने बताया, ‘दोनों किशोरियां पुलिस से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने और सिम कार्ड बदल रही थीं।’
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दोनों नाबालिग लड़कियां अपनी पहचान छिपाने और पुलिस की पकड़ से बचने के लिए लगातार नए ठिकाने और सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रही थीं। एएचटीयू की टीम ने अथक प्रयास, तकनीकी निगरानी और स्थानीय पुलिस व समुदाय की मदद से इन जटिल मामलों को सुलझाया और दोनों किशोरियों को उनके परिवारों तक पहुंचाया, जिससे उनके परिजनों ने राहत की सांस ली।
ठिकाने और सिम बदल कर बच रही थीं लड़कियां
दूसरा मामला आनंद पर्वत थाना क्षेत्र का है, जहां दिसंबर 2025 (यह तिथि स्रोत में दी गई है) से एक 15 वर्षीय किशोरी लापता थी। उसकी तलाश के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि वह मधुबनी जिले के बेनीपट्टी में है। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह सहरघाट चली गई।
पुलिस टीम ने करीब 200 किलोमीटर तक उसका पीछा किया और ग्राम मुखिया व स्थानीय पुलिस की सहायता से उसे भी सकुशल बरामद कर लिया। जांच के दौरान यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि दोनों किशोरियां पुलिस से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने और सिम कार्ड बदल रही थीं।
इन दोनों सफल बरामदगियों ने दिल्ली पुलिस की एएचटीयू की कार्यप्रणाली और तकनीकी दक्षता को उजागर किया है। नाबालिगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें उनके परिवारों से मिलाने के लिए पुलिस का यह अथक प्रयास महत्वपूर्ण है।








