Bihar Student Protest: जनशक्ति जनता दल प्रमुख तेजप्रताप यादव की गिरफ्तारी के बाद बिहार की राजनीति में छात्र आंदोलन का मुद्दा और तेज हो गया है। शनिवार को हुए प्रदर्शन के दौरान घायल हुए सीवान के छात्रों से मिलने के लिए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव पटना के मेदांता अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायल छात्रों और उनके परिजनों से लंबी बातचीत की और आंदोलनकारी छात्रों के संघर्ष को अपना पूरा समर्थन दिया।
तेज प्रताप की गिरफ्तारी पर तेजस्वी का बड़ा ऐलान: ‘रिहा नहीं किया तो होगा आंदोलन’
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि जब छात्रों पर दर्ज मामले वापस लेने का फैसला हो चुका है, तब भी कई छात्रों पर केस दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जा रहा है। इसी बीच, पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के बाद तेजप्रताप यादव की गिरफ्तारी ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है। तेजस्वी यादव ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनके बड़े भाई को जल्द रिहा नहीं किया गया तो राजद एक बड़ा आंदोलन शुरू करेगा। तेजप्रताप की गिरफ्तारी पर उनकी बहन रोहिणी आचार्य ने भी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने इसे ‘सम्राट सरकार की तानाशाही’ करार दिया।






घायल छात्रों से मिलकर तेजस्वी ने सरकार को घेरा
अस्पताल पहुंचकर तेजस्वी यादव ने घायल छात्रों का हालचाल पूछा और उनके परिजनों से भी बात की। उन्होंने कहा कि छात्रों ने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई है, जिसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं। तेजस्वी यादव ने सरकार के रवैये को दोहरा बताया। उनका कहना था कि एक तरफ आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज मामले वापस लेने की बात कही गई, वहीं दूसरी तरफ बिहार में छात्रों पर नए मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई छात्रों को जबरन जेल भेजा जा रहा है।
पेपर लीक और छात्रों पर दर्ज केस: क्या है पूरा विवाद?
पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि उनके बड़े भाई को गिरफ्तार किया गया है और उन पर कई धाराएं लगाई गई हैं। उन्होंने दोहराया कि यदि तेजप्रताप यादव को रिहा नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और भी बड़ा रूप ले लेगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब छात्र लगातार पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और इन प्रदर्शनों के बाद कई छात्रों पर मामले दर्ज किए गए हैं।तेजप्रताप यादव की गिरफ्तारी और तेजस्वी यादव की चेतावनी के बाद बिहार की राजनीति में तनाव बढ़ गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और अधिक राजनीतिक बयानबाजी और विरोध प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं, जिससे सरकार पर छात्रों के मामलों को लेकर दबाव बढ़ सकता है।








