Siwan News: सीवान: मांझी विधायक रणधीर कुमार सिंह को नौ साल पुराने एक मामले में बड़ी राहत मिली है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान दर्ज आचार संहिता उल्लंघन के एक मामले में न्यायिक दंडाधिकारी नेहा त्रिपाठी की अदालत ने उन्हें दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया है। पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण अदालत ने यह फैसला सुनाया, जिसके साथ ही 2014 के लोकसभा चुनाव से जुड़ा यह मामला कानूनी रूप से समाप्त हो गया है।
क्या था अग्निपीड़ितों को कपड़े बांटने का आरोप?
यह मामला 30 अप्रैल 2014 का है, जब बसंतपुर थाना क्षेत्र की बैजू बरहोगा पंचायत के सेरिया गांव में अग्निपीड़ित परिवारों के बीच धोती और साड़ी बांटे जाने की शिकायत मिली थी। इस घटना के बाद राजस्व कर्मचारी जितेंद्र कुमार सिंह के आवेदन पर बसंतपुर थाना में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उस समय रणधीर कुमार सिंह तत्कालीन महाराजगंज लोकसभा सीट से राजद प्रत्याशी प्रभुनाथ सिंह के पुत्र थे। प्राथमिकी में रणधीर कुमार सिंह समेत कुल तीन लोगों को आरोपी बनाया गया था।






अदालत में गवाह अपने बयान से मुकरे
विधायक रणधीर कुमार सिंह के अधिवक्ता अविनाश कुमार सिंह उर्फ मदन सिंह ने बताया कि इस मामले की सुनवाई न्यायिक दंडाधिकारी नेहा त्रिपाठी की अदालत में चल रही थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दो गवाहों की गवाही कराई। हालांकि, अदालत में दोनों गवाह अपने पूर्व के बयान से मुकर गए। गवाहों के बयान से मुकरने के बाद अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपों को साबित करने के लिए कोई पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हो सका। इसके बाद अदालत ने मामले में प्रस्तुत सभी तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों पर गहन विचार किया।
साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने किया बरी
सभी पक्षों को सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद न्यायिक दंडाधिकारी नेहा त्रिपाठी की अदालत ने रणधीर कुमार सिंह को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया और उन्हें बरी कर दिया। इस फैसले के साथ ही 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान दर्ज आचार संहिता उल्लंघन का यह बहुचर्चित मामला कानूनी रूप से समाप्त हो गया है। रणधीर कुमार सिंह के लिए यह एक महत्वपूर्ण कानूनी जीत मानी जा रही है।








