Bihar LNMU: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) और डॉ बिन्देश्वर पाठक रिसर्च फाउंडेशन के बीच हुए एक ऐतिहासिक समझौते से दरभंगा सहित पूरे मिथिला क्षेत्र में सामाजिक विकास और स्वच्छता के नए अध्याय की शुरुआत हुई है। बुधवार, 29 जुलाई को नई दिल्ली स्थित सुलभ इंटरनेशनल के डॉ बिन्देश्वर पाठक रिसर्च फाउंडेशन और LNMU ने एक महत्त्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य स्वच्छता, सार्वजनिक स्वास्थ्य, सामाजिक समावेशन और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मिलकर काम करना है।
इस एमओयू के तहत दोनों संस्थान नीति-आधारित अनुसंधान, कौशल विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) गवर्नेंस और सामुदायिक विकास के लिए संयुक्त रूप से कार्यक्रम चलाएंगे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो संजय कुमार चौधरी ने इस अवसर पर कहा कि यह समझौता केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि समाज के प्रति विश्वविद्यालय की गहरी प्रतिबद्धता का विस्तार है।






स्वच्छता से सम्मान तक: क्या है इस समझौते में खास?
कुलपति प्रो संजय कुमार चौधरी ने विश्वविद्यालय के अधिकार क्षेत्र में आने वाले चारों जिलों के लिए आगामी एक वर्ष की विस्तृत कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया है। इसके माध्यम से स्वच्छता, शिक्षा, महिला एवं युवा सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक नवाचार और सामुदायिक विकास के क्षेत्रों में ठोस कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि पद्म विभूषण डॉ बिन्देश्वर पाठक के विचारों और उनके सामाजिक सरोकारों को जन-जन तक पहुँचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
डॉ सुतीर्थ साहारिया, उप निदेशक, डॉ बिन्देश्वर पाठक रिसर्च फाउंडेशन और वरिष्ठ उपाध्यक्ष, सुलभ इंटरनेशनल ने कहा, ‘स्वच्छता केवल अवसंरचना का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान, समानता और मानवीय गरिमा से जुड़ा आंदोलन है।’
डॉ साहारिया ने राष्ट्रीय सीवर प्रणाली की अवधारणा, स्वच्छता से जुड़े सामाजिक कलंक को खत्म करने की आवश्यकता और सामुदायिक सशक्तिकरण में स्वच्छता की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि एमओयू के तहत विश्वविद्यालय में गुणात्मक अनुसंधान पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित होंगी, जिनमें शिक्षकों और शोधार्थियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। उत्कृष्ट प्रतिभागियों को शोध छात्रवृत्ति देने की भी योजना है।
मिथिला के चार जिलों में दिखेगा बदलाव: कुलपति का बड़ा विजन
इस समझौते से LNMU को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस गवर्नेंस, सार्वजनिक नीति, सामाजिक नवाचार और सतत विकास जैसे उभरते विषयों पर संयुक्त शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। सलाहकार, सुलभ इंटरनेशनल और सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी जी.पी. उपाध्याय ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय की भूमिका पर प्रकाश डाला।
जी.पी. उपाध्याय ने कहा, ‘विश्वविद्यालय की वास्तविक भूमिका केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज में परिवर्तन का नेतृत्व करना है।’
कार्यक्रम में डॉ बॉबी लूथरा (क्वालिटेटिव लीड रिसर्चर) और संजय सुमन (लीड प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर) ने भी विश्वविद्यालय के साथ दीर्घकालिक सहयोग का विश्वास व्यक्त किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव डॉ दिव्या हांसदा, आईक्यूएसी निदेशक डॉ मो ज़्या हैदर, एमओयू नोडल पदाधिकारी डॉ मनु राज शर्मा, खेल पदाधिकारी डॉ अमृत कुमार झा, उप कुलसचिव (प्रथम) डॉ उमाकांत, विकास पदाधिकारी डॉ अभिषेक कुमार सहित कई अन्य शिक्षक और पदाधिकारी उपस्थित थे।
शोध और सामाजिक सरोकार: डॉ. पाठक की विरासत को आगे बढ़ाना
डॉ बिन्देश्वर पाठक रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना डॉ बिन्देश्वर पाठक की विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए की गई है। उनकी विचारधारा सामाजिक परिवर्तन, स्वच्छता, गरिमामय जीवन, सामाजिक न्याय और सतत विकास पर केंद्रित है। इस एमओयू के माध्यम से अनुसंधान, नीति निर्माण, क्षमता विकास और जनसहभागिता के जरिए इन लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा।
यह समझौता मिथिला क्षेत्र में समाजोपयोगी अनुसंधान, जन-जागरूकता और सामुदायिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम चारों जिलों में देखने को मिलेंगे, जिससे क्षेत्र के लोगों के जीवन स्तर में सुधार आएगा और सामाजिक सम्मान बढ़ेगा।








