Bihar Expressway: रक्सौल-हल्दिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर बांका जिले में हलचल तेज हो गई है। करीब 600 किलोमीटर लंबे इस महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे का लगभग 75 किलोमीटर हिस्सा बांका जिले से होकर गुजरेगा। इस विशाल सड़क परियोजना के लिए जिले के 5 प्रखंडों के 58 गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया जाना है, जिसकी प्रशासनिक स्तर पर जमीन के सत्यापन और कागजातों की जांच का काम शुरू हो चुका है, ताकि योजना समय पर आगे बढ़ सके।
पहले चरण में 29 गांवों का सर्वे शुरू
जिला भू-अर्जन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, शंभूगंज, अमरपुर और बांका प्रखंड के 29 गांवों से जुड़ी थ्री-ए अधिसूचना की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। यह रिपोर्ट मिलने के बाद अधिकारियों ने इन गांवों में जमीन के खाता-खेसरा, कुल क्षेत्रफल और जमीन के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी है। प्रशासन का कहना है कि,






कागजातों का सत्यापन पूरा होने के तुरंत बाद आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा और प्रभावित जमीन मालिकों के लिए मुआवजे की राशि तय की जाएगी।
यह प्रक्रिया पारदर्शिता सुनिश्चित करने और प्रभावित किसानों को उनका हक दिलाने के लिए महत्वपूर्ण है।
बाकी बचे प्रखंडों की रिपोर्ट का इंतजार
रक्सौल-हल्दिया Bihar Expressway परियोजना के तहत आने वाले फुल्लीडुमर और कटोरिया प्रखंड के शेष 29 राजस्व गांवों की थ्री-ए रिपोर्ट अभी जिला भू-अर्जन कार्यालय को नहीं मिली है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि,
जैसे ही इन गांवों की रिपोर्ट प्राप्त होगी, वहां भी तुरंत सत्यापन और अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सभी कानूनी औपचारिकताओं को तय समय के भीतर पूरा करना है ताकि सड़क निर्माण के काम में किसी तरह की बाधा या देरी न आए।
इस ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का सबसे बड़ा हिस्सा बिहार राज्य में पड़ता है, जहां इसकी कुल लंबाई लगभग 406 किलोमीटर होगी। झारखंड में यह करीब 90 किलोमीटर और पश्चिम बंगाल में 90 से 100 किलोमीटर के बीच रहेगा।
बांका जिले में ऐसा रहेगा एक्सप्रेसवे का रूट और आर्थिक लाभ
रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे सबसे पहले शंभूगंज प्रखंड के रास्ते बांका जिले की सीमा में प्रवेश करेगा। इसके बाद यह सड़क फुल्लीडुमर, अमरपुर और बांका प्रखंड से होते हुए कटोरिया पहुंचेगी और वहां से सीधे झारखंड की सीमा में प्रवेश कर जाएगी। झारखंड के देवघर के पास से गुजरते हुए यह मार्ग सीधे पश्चिम बंगाल के हल्दिया बंदरगाह तक पहुंचेगा। यह नया कॉरिडोर बिहार के कई पिछड़े इलाकों को सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क और प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से जोड़ेगा, जिससे व्यापार और आवागमन में अभूतपूर्व सुविधा मिलेगी।
इस एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य के दौरान ही हजारों स्थानीय लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिलने की उम्मीद है। सड़क निर्माण, मशीनरी संचालन, सामग्री परिवहन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े कामों में बड़े पैमाने पर युवाओं को काम मिलेगा। इसके अलावा, एक्सप्रेसवे तैयार होने के बाद इसके दोनों तरफ पेट्रोल पंप, ढाबे, होटल, गैरेज और ट्रांसपोर्ट हब खुलेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और छोटी दुकानों के लिए बेहतरीन अवसर बनेंगे, जो क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति देंगे।
अकेले बांका जिले में 75 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण होगा, जिसके लिए पांचों प्रखंडों के 58 गांवों की जमीन को पारदर्शी तरीके से अधिग्रहित किया जा रहा है। यह परियोजना न केवल कनेक्टिविटी सुधारेगी बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए आर्थिक उत्थान का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।








