Bihar Kanwar Yatra: बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी मिथिलेश कुमार इस श्रावणी मेले में अपनी आस्था और समाज को एक मजबूत संदेश देने के लिए दंडवत यात्रा पर निकले हैं। उनकी यह यात्रा इसलिए खास है, क्योंकि वह अपनी महज दो माह की बेटी को डोली में बिठाकर बाबा बैद्यनाथ धाम जा रहे हैं। भागलपुर के कच्ची कांवरिया पथ पर इस अनोखे दृश्य को देख हर कोई रुककर पिता की श्रद्धा और बेटी के प्रति उनके प्रेम की सराहना कर रहा है।
अनोखी आस्था, बेटी के सम्मान का संकल्प
मिथिलेश कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के दौरान उन्होंने भोलेनाथ से पुत्री रत्न की कामना की थी। उसी समय उन्होंने यह संकल्प लिया था कि यदि उनके घर बेटी का जन्म होगा, तो वह अगली बार दंडवत यात्रा करते हुए अपनी बेटी को बाबा के दरबार लेकर जाएंगे। वर्ष 2026 में उनकी यह मनोकामना पूरी हुई। मिथिलेश कुमार के परिवार में पहले से एक बेटा है, लेकिन बेटी के आने से उनका परिवार अब पूरा हो गया है।






‘पिछले वर्ष बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के दौरान उन्होंने भोलेनाथ से पुत्री रत्न की कामना की थी। उन्होंने संकल्प लिया था कि यदि उनके घर बेटी का जन्म होगा तो वह अगली बार दंडवत यात्रा करते हुए अपनी बेटी को बाबा के दरबार लेकर जाएंगे।’
नन्ही परी की यात्रा में सुविधाओं का खास इंतजाम
अपनी दो माह की बेटी की सुविधा के लिए मिथिलेश कुमार ने डोली में विशेष व्यवस्था की है। उन्होंने पालकी में पंखा, लाइट और सोलर ऊर्जा से चलने वाली अन्य सुविधाएं लगाई हैं। इसका उद्देश्य है कि लंबी और कठिन यात्रा के दौरान उनकी नन्ही बेटी को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। कच्ची कांवरिया पथ से गुजरते समय, श्रद्धालु इस अनोखी डोली को देखने के लिए उत्सुकता से रुक जाते हैं।
समाज को बेटियों के महत्व का संदेश
मिथिलेश कुमार की यह यात्रा सिर्फ उनकी व्यक्तिगत श्रद्धा का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह समाज को बेटियों के सम्मान और उनके महत्व का भी सकारात्मक संदेश दे रही है। जहां एक ओर शिवभक्त अपनी आस्था के विभिन्न रूप दिखाते हैं, वहीं यह पिता अपनी बेटी के साथ इस तरह की कठिन यात्रा करके ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों को एक नया आयाम दे रहा है। यह अनूठी पहल बेटियों के प्रति समाज के नजरिए को बदलने में सहायक हो सकती है।








