Bihar Sanskrit University: दरभंगा स्थित संस्कृत विश्वविद्यालय को अब समन्वय और विकास की नई दिशा मिलेगी। नागार्जुन उमेश संस्कृत महाविद्यालय, तरौनी के प्रधानाचार्य डॉ० शिवलोचन झा को तीन वर्षों के लिए समन्वयक, महाविद्यालय विकास परिषद (सी०सी०डी०सी०) नियुक्त किया गया है। इस महत्वपूर्ण नियुक्ति के साथ बिहार संस्कृत विश्वविद्यालय के कई लंबित कार्यों के तेजी से निष्पादन की उम्मीद जगी है।
डॉ. शिवलोचन झा को मिली दोहरी जिम्मेदारी
पीआरओ डॉ निशिकांत ने इस नियुक्ति के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डॉ. शिवलोचन झा को सी०सी०डी०सी० के पद के साथ-साथ प्राधिकार शाखा के प्रभारी का भी दायित्व सौंपा गया है। यह दोहरी जिम्मेदारी उनके अनुभव और कार्यक्षमता पर विश्वविद्यालय प्रशासन के विश्वास को दर्शाती है।






हालांकि, जब तक नागार्जुन उमेश संस्कृत महाविद्यालय, तरौनी में वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक डॉ० झा अपने महाविद्यालय के कार्यों का निष्पादन पूर्व की भाँति करते रहेंगे। यह सुनिश्चित करेगा कि उनकी नई भूमिका के कारण महाविद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों में कोई व्यवधान न आए।
बिहार संस्कृत विश्वविद्यालय के लिए क्या हैं उम्मीदें?
डॉ० झा का विश्वविद्यालय में लंबा अनुभव रहा है। इससे पहले भी वह अध्यक्ष छात्र कल्याण समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनके मुख्यालय आने से विश्वविद्यालय के अंदरूनी कामकाज में गति आने की संभावना है। विशेष रूप से, कई प्रशासनिक और अकादमिक मामले जो लंबे समय से लंबित थे, उनके निपटारे में तेजी आ सकती है।
यह नियुक्ति दरभंगा के संस्कृत विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जिससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को लाभ मिलेगा।








