Patna Township: बिहार की राजधानी पटना के जमीन मालिकों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। बहुप्रतीक्षित पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के दायरे में आने वाली जमीनों की खरीद-बिक्री पर लगी रोक अब हटा ली गई है। सरकार ने इस संबंध में प्रक्रिया को स्पष्ट कर दिया है, जिससे जमीन बेचने का रास्ता खुल गया है। हालांकि, जमीन मालिकों को सौदा करने से पहले कुछ अनिवार्य औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
जमीन बेचने से पहले क्या है नया नियम?
पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के चिन्हित क्षेत्र में अगर आपकी जमीन आती है और आप उसे बेचना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको नगर विकास एवं आवास विभाग को इसकी सूचना देनी होगी। इसके साथ ही, जमीन बेचने की स्पष्ट वजह भी बतानी अनिवार्य होगी। इस नए नियम का पालन किए बिना किए गए किसी भी लेन-देन को सरकारी प्रक्रिया के तहत वैध नहीं माना जाएगा। यह कदम सुनिश्चित करेगा कि जमीन की खरीद-बिक्री पारदर्शी तरीके से हो।





रोक क्यों लगी थी और अब क्यों हटी?
दरअसल, पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप की घोषणा के बाद संबंधित इलाकों में जमीन की गतिविधियों में तेजी आ गई थी। सरकार को यह आशंका थी कि टाउनशिप की घोषणा का फायदा उठाकर जमीन की अवैध सट्टेबाजी हो सकती है और बिचौलिये सक्रिय हो सकते हैं। इसी वजह से टाउनशिप के दायरे में आने वाली जमीनों की खरीद-बिक्री पर अस्थाई रोक लगा दी गई थी।
इस रोक के कारण किसानों और स्थानीय जमीन मालिकों को अपनी आर्थिक और आपातकालीन जरूरतों के लिए जमीन बेचने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इन व्यावहारिक दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग ने 1 अगस्त को एक औपचारिक अधिसूचना जारी कर खरीद-बिक्री पर लगी रोक को हटा दिया। यह फैसला लाखों जमीन मालिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।
कैसा होगा पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड टाउनशिप?
पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को लगभग 81,730 एकड़ के विशाल क्षेत्र में विकसित करने की योजना है, जो वर्तमान पटना शहर से भी बड़ा होगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत, विकसित की जाने वाली कुल जमीन का करीब 35 प्रतिशत हिस्सा आवासीय इलाकों के लिए आरक्षित होगा। यहां आधुनिक रिहायशी बस्तियों और बहुमंजिला आवासीय सोसाइटियों का निर्माण किया जाएगा।
टाउनशिप में लगभग 6 प्रतिशत क्षेत्र औद्योगिक गतिविधियों और मैन्युफैक्चरिंग हब के लिए निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, इस नए शहर में बेहतर परिवहन व्यवस्था, बड़े ग्रीन बेल्ट, सुंदर पार्क, आधुनिक स्वास्थ्य केंद्र, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संस्थान भी विकसित किए जाएंगे। यह टाउनशिप बिहार के शहरी विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी।
बिहार शहरी आयोजना एवं विकास बोर्ड ने टाउनशिप के ड्राफ्ट प्लान पर आम लोगों, किसानों और अन्य हितधारकों से राय और आपत्तियां मांगी हैं, जिसके लिए 60 दिनों की समय-सीमा तय की गई है। इस अवधि में प्राप्त सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा के बाद, जमीन की खरीद-बिक्री और निर्माण से जुड़े नियमों में आवश्यकतानुसार और अधिक लचीलापन लाया जा सकता है, जिससे यह परियोजना और अधिक जन-अनुकूल बन सके।








