Munger Hospital Negligence: क्या एक सरकारी अस्पताल मरीजों को जीवनदान देने के बजाय उनकी जान जोखिम में डाल सकता है? मुंगेर के जमालपुर स्थित पूर्व रेलवे मुख्य अस्पताल से एक ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने समूचे रेल महकमे और चिकित्सा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। यहाँ गर्म दूध से गंभीर रूप से झुलसी एक महिला मरीज को अस्पताल की घोर लापरवाही के चलते एक्सपायरी डेट का सलाइन चढ़ाया जा रहा था। इस चौंकाने वाली घटना के खुलासे के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया, लेकिन इसके बाद जो प्रतिक्रियाएँ सामने आईं, उन्होंने संवेदनशीलता की सारी हदें पार कर दीं।
रेलकर्मी की पत्नी को चढ़ा ‘खतरनाक’ सलाइन, भाई ने खोली पोल
यह पूरी घटना रेलवे के कैरिज एंड वेगन विभाग में कार्यरत रेलकर्मी गुलशन कुमार की पत्नी जया कुमारी के साथ घटी। बीते 11 अगस्त की रात गर्म दूध से बुरी तरह झुलसने के बाद जया को उनके पति ने गंभीर हालत में पूर्व रेलवे मुख्य अस्पताल जमालपुर के फीमेल वार्ड में भर्ती कराया था। यहाँ बेड संख्या दो पर उनका इलाज चल रहा था और उन्हें लगातार सलाइन दिया जा रहा था। शुक्रवार को जब जया का भाई अपनी बहन का हाल जानने अस्पताल पहुँचा, तो उसकी नज़र सलाइन की बोतल पर लिखी एक्सपायरी डेट पर पड़ी। उसने देखा कि वह सलाइन कई महीने पहले ही एक्सपायर हो चुका था। यानी, इतने समय से एक गंभीर मरीज को एक्सपायर्ड सलाइन चढ़ाया जा रहा था, जो उसकी जान के लिए बेहद खतरनाक था।

लापरवाही पकड़े जाने पर नर्स का अमानवीय जवाब: ‘घर से लाऊं क्या?’
अपनी बहन की जान को खतरे में देख भाई ने तुरंत सबूत के तौर पर सलाइन की बोतल का वीडियो और फोटो अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। जब उसने इस भारी लापरवाही की शिकायत वार्ड में तैनात ड्यूटी नर्स से की, तो नर्स ने अपनी गलती मानने या उसे सुधारने के बजाय उल्टा भाई को ही बुरी तरह डांटना शुरू कर दिया। नर्स ने बेहद गैर-जिम्मेदाराना लहजे में रौब झाड़ते हुए कहा:
‘जब अस्पताल में यही सलाइन उपलब्ध है, तो वह भला अपने घर से नया सलाइन लाकर कहाँ से चढ़ाएगी।’
नर्स की इस बेरुखी और बदतमीजी ने अस्पताल में मौजूद अन्य मरीजों और उनके परिजनों के गुस्से को और भड़का दिया। इस घटना ने बिहार के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की सफाई पर भी खड़े हुए सवाल
मामला बढ़ता देख अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. जेके प्रसाद ने इस घोर लापरवाही पर पर्दा डालने की कोशिश की। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि सलाइन के पूरे लॉट में गलती से एक बोतल एक्सपायरी डेट की आ गई थी, जिसका थोड़ा ही हिस्सा मरीज को चढ़ाया गया है और अब उस पूरे लॉट की जांच की जा रही है।
‘सलाइन के पूरे लॉट में गलती से एक बोतल एक्सपायरी डेट की आ गई थी, जिसका थोड़ा ही हिस्सा मरीज को चढ़ाया गया है और अब उस पूरे लॉट की जांच की जा रही है।’
हालांकि, CMS की यह दलील कई बड़े सवाल खड़े करती है। क्या किसी बड़े रेलवे अस्पताल में मरीजों की जिंदगी के साथ इस कदर खिलवाड़ किया जा सकता है? क्या किसी मरीज को एक्सपायर्ड सलाइन चढ़ाने के बाद यह सफाई पर्याप्त है कि उसे सिर्फ थोड़ा ही हिस्सा चढ़ाया गया था? इस घटना ने Munger Hospital Negligence को उजागर किया है और अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े किए हैं, जिनकी जांच और कार्रवाई आवश्यक है।







