Patna News: पटना। पटना की मेयर सीता साहू को नगर निगम ने एक बड़ा नोटिस जारी किया है। यह नोटिस शहर में आवासीय परिसर के कथित अनधिकृत गैर-आवासीय उपयोग के संबंध में दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए निगम के अजीमाबाद अंचल के कार्यपालक पदाधिकारी ने यह कार्रवाई की है। इस मामले में मेयर के दो बेटों, शिशिर कुमार और सुशांत कुमार को भी नोटिस भेजा गया है, जिनका संबंध उक्त परिसर से बताया जा रहा है। हालांकि, शिशिर कुमार का दावा है कि विवादित संपत्ति का उपयोग पूरी तरह से आवासीय उद्देश्यों के लिए ही किया जा रहा है।
26,746 संपत्तियों की हुई पहचान, निगम की बड़ी कार्रवाई
पटना नगर निगम ने शहर भर में एक व्यापक सर्वेक्षण किया है, जिसमें 26,746 ऐसी आवासीय संपत्तियों की पहचान की गई है जिनका कथित तौर पर गैर-आवासीय या व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद, निगम ने अपने सभी अंचलों में वार्ड-वार सर्वेक्षण कराया है। जिन भूस्वामियों, बिल्डरों, डेवलपर्स और इन संपत्तियों के कब्जेदारों की पहचान की गई है, उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जा रहा है। संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर विभिन्न तिथियों पर संबंधित अंचल कार्यालयों में सुनवाई के लिए बुलाया गया है। निगम ने स्पष्ट किया है कि संपत्ति मालिकों और कब्जेदारों को कोई भी कार्रवाई करने से पहले आवश्यक दस्तावेज और अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा।

मेयर से मांगे गए महत्वपूर्ण दस्तावेज
मेयर सीता साहू को 8 जुलाई को जारी नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उनके परिसर में गैर-आवासीय गतिविधियां या उपयोग पाया गया है। नगर निगम ने उनसे कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मांगे हैं, जिनमें गैर-आवासीय उपयोग की अनुमति का प्रमाण, जैसे अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC), भूमि स्वामित्व का प्रमाण, स्वीकृत भवन योजना और अधिभोग प्रमाण पत्र (Occupancy Certificate) शामिल हैं। नोटिस में मेयर से यह भी पूछा गया है कि यदि कथित गैर-आवासीय उपयोग अवैध पाया जाता है, तो उनके खिलाफ बंद करने, सील करने या ध्वस्त करने जैसी कार्रवाई क्यों न की जाए। इसमें यह भी चेतावनी दी गई है कि निर्धारित अवधि के भीतर जवाब और आवश्यक दस्तावेज जमा करने में विफल रहने पर निगम यह मानकर आगे बढ़ेगा कि संबंधित पक्ष के पास कोई बचाव नहीं है।
नगर पालिका नियमों के तहत, निर्माण शुरू होने से पहले भवन योजनाओं को अनुमोदित किया जाना चाहिए और उन्हें निर्दिष्ट भूमि उपयोग और लागू भवन उपनियमों का पालन करना चाहिए। निर्माण को स्वीकृत योजना का पालन करना आवश्यक है, जबकि भवन का बाद का उपयोग भी अनुमत भूमि उपयोग और स्वीकृत योजना के अनुरूप होना चाहिए। निगम इन प्रावधानों के उल्लंघन स्थापित होने पर कार्रवाई कर सकता है।
पार्षद ने उठाया नियमों की अस्पष्टता पर सवाल
वार्ड 28 के पार्षद विनय कुमार पप्पू ने आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों की स्पष्ट परिभाषा के बिना नोटिस जारी करने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ऐसी कार्रवाई को तत्काल रोकने और नगर निगम की सीमा में आवासीय व व्यावसायिक क्षेत्रों का औपचारिक सर्वेक्षण, सीमांकन और अधिसूचना जारी करने की मांग की है। पप्पू ने उन क्षेत्रों की सार्वजनिक जानकारी भी मांगी है जिन्हें आधिकारिक तौर पर आवासीय क्षेत्र घोषित किया गया है। उन्होंने उन संपत्तियों के लिए कर आकलन की समीक्षा की भी मांग की है जिनसे निगम वर्षों से व्यावसायिक कर वसूल रहा है। उनका तर्क है कि इस मुद्दे की जांच आवासीय संपत्तियों के कथित व्यावसायिक उपयोग के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करते समय, संपत्ति मालिकों और व्यावसायिक संचालकों को कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने से पहले स्पष्ट जानकारी और अपना पक्ष प्रस्तुत करने का उचित अवसर मिलना चाहिए।
आगे क्या?
पटना नगर निगम द्वारा शुरू की गई यह कार्रवाई शहर में अवैध निर्माण और अनधिकृत भूमि उपयोग के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है। मेयर जैसी प्रमुख हस्ती को नोटिस मिलने से यह स्पष्ट है कि निगम किसी भी स्तर पर नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं करेगा। आने वाले दिनों में कई और संपत्तियों पर कार्रवाई होने की संभावना है, जिससे शहर के शहरी नियोजन में सुधार आ सकता है।







