Bihar TRE-4 Notification: पटना के पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर आज से ‘छात्र न्याय सत्याग्रह’ शुरू हो गया है। BPSC TRE-4 भर्ती के नोटिफिकेशन (संभावित 32,388 पदों के लिए) समेत कई अहम मांगों को लेकर छात्र नेता दिलीप कुमार के नेतृत्व में अभ्यर्थियों ने जोरदार प्रदर्शन शुरू किया है। सरकार को तीन दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा गया है कि यदि मांगे नहीं मानी गईं तो 21 अगस्त से आमरण अनशन किया जाएगा।

3 दिन का अल्टीमेटम, फिर आमरण अनशन की चेतावनी
छात्र नेता दिलीप कुमार ने चेतावनी दी है कि अगले तीन दिनों तक छात्र शांतिपूर्वक गर्दनीबाग में धरना देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर इस अवधि में BPSC TRE-4 का विज्ञापन एकल परीक्षा के साथ जारी नहीं होता है, तो 21 अगस्त से सभी अभ्यर्थी आमरण अनशन पर बैठ जाएंगे।
उन्होंने बिहार भर के छात्रों से रूम, लाइब्रेरी, लॉज, हॉस्टल और कोचिंग से निकलकर आंदोलन में शामिल होने की अपील की। दिलीप कुमार ने कहा कि आंदोलन में छात्रों की संख्या सरकार तक उनकी मांग की गंभीरता पहुंचाने का माध्यम बनेगी।
“3 दिनों तक हमलोग गर्दनीबाग में बैठकर शांति से प्रदर्शन करेंगे। लेकिन अगर तीन दिनों के बाद भी नोटिफिकेशन नहीं आया तो फिर 21 अगस्त से अमरण अनशन करेंगे। सरकार को छात्रों की मांगों पर फैसला लेना होगा।”
शिक्षक भर्ती के साथ कई अन्य महत्वपूर्ण मांगें
इस आंदोलन में केवल BPSC TRE-4 का विज्ञापन जारी करने की मांग ही नहीं है, बल्कि BSSC, दारोगा, सिपाही और AEDO जैसी अन्य भर्तियों से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं। छात्रों ने सभी लंबित परीक्षाओं की तिथि घोषित करने और भर्ती प्रक्रियाओं में पूरी पारदर्शिता लाने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, परीक्षा समाप्त होने के बाद OMR शीट की कार्बन कॉपी और आंसर-की जारी करने की भी मांग प्रमुखता से उठाई गई है। रिजल्ट के समय कटऑफ के साथ अभ्यर्थियों के अंक सार्वजनिक करने की भी मांग रखी गई है।
आंदोलनकारियों ने BPSC सिविल सेवा परीक्षा में हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के साथ कथित भेदभाव को खत्म करने और पेपर लीक व गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग भी की है। दिलीप कुमार ने कहा कि दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग और आंदोलन का स्वरूप
छात्र नेता दिलीप कुमार ने BPSC TRE-4 विज्ञापन में देरी को लेकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले जुलाई में विज्ञापन जारी करने की बात कही गई थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसी को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं।
दिलीप कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंदोलन छात्रों का अपना आंदोलन रहेगा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं और कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोगों को मंच पर जगह देने का निर्णय अभ्यर्थी आपस में विचार-विमर्श के बाद लेंगे, हालांकि उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस छात्र हितैषी आंदोलन का समर्थन करने की अपील की है। दिलीप कुमार ने इस लड़ाई को बिहार के छात्र और युवाओं से जुड़े मुद्दों की लड़ाई बताया और अधिक से अधिक अभ्यर्थियों से गर्दनीबाग पहुंचने की अपील की।
गर्दनीबाग में शुरू हुआ यह ‘छात्र न्याय सत्याग्रह’ बिहार के हजारों अभ्यर्थियों की उम्मीदों से जुड़ा है। सरकार के अगले तीन दिनों के रुख पर ही आंदोलन का भविष्य और छात्रों की अगली रणनीति निर्भर करेगी। यदि सरकार छात्रों की मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो 21 अगस्त से राज्य में एक बड़ा छात्र आंदोलन देखने को मिल सकता है।








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