Darbhanga POCSO Case: बिहार के दरभंगा में एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। डीएनए रिपोर्ट ने दोषी को कठघरे में खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दरभंगा की पॉक्सो अदालत ने भालपट्टी गाँव के अनिरुद्ध मंडल को दोषी करार दिया है। अब इस जघन्य अपराध के लिए उसे 25 अगस्त को सजा सुनाई जाएगी।
यह मामला महिला थाना प्राथमिकी और जीआर नंबर 102/23 से जुड़ा है। आरोप था कि नाबालिग पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया गया, जिसके परिणामस्वरूप वह गर्भवती हो गई और उसने एक शिशु को जन्म दिया। अभियोजन पक्ष ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सात गवाहों को अदालत में पेश किया, जिन्होंने अपनी गवाही से केस को मजबूत बनाया।
डीएनए रिपोर्ट ने खोली पोल, दोषी अनिरुद्ध मंडल
इस पूरे मामले में सबसे अहम मोड़ तब आया जब नवजात शिशु और आरोपी अनिरुद्ध मंडल का डीएनए एक जैसा पाया गया। विशेष लोक अभियोजक विजय कुमार पराजित ने अभियोजन पक्ष का संचालन करते हुए डीएनए रिपोर्ट और साक्षियों के बयानों को मजबूती से पेश किया। यह वैज्ञानिक साक्ष्य दोषी को सजा दिलाने में निर्णायक साबित हुआ।
विशेष न्यायाधीश श्रीमती सुलेखा झा ने बुधवार को अनिरुद्ध मंडल को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (2) और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी करार दिया।
25 अगस्त को सजा के बिंदु पर सुनवाई
अदालत ने अनिरुद्ध मंडल को दोषी ठहराने के बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 25 अगस्त की तारीख निर्धारित की है। इस दिन विशेष न्यायाधीश श्रीमती सुलेखा झा दुष्कर्म के दोषी को मिलने वाली सजा की अवधि तय करेंगी। इस फैसले से समाज में यह संदेश गया है कि नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अपराधों में न्याय अवश्य मिलेगा, खासकर जब वैज्ञानिक साक्ष्य मौजूद हों।
यह निर्णय न केवल पीड़िता को न्याय दिलाएगा, बल्कि भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने में भी सहायक होगा। डीएनए जैसी आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों का उपयोग अपराधियों को कानून के कटघरे में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।







