Darbhanga Cyber Crime: प्रभास रंजन दरभंगा। साइबर ठगी का शिकार हुए एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी को बड़ी राहत मिली है। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 35 लाख 74 हजार रुपये गंवाने वाले 73 वर्षीय राम बहादुर कामत को दरभंगा साइबर थाना की सक्रियता से अपनी पूरी रकम वापस मिल गई है। एसएसपी जगुनाथ रडी जलरडी के निर्देश पर प्रभारी सदर एसडीपीओ एसके सुमन ने इस महत्वपूर्ण सफलता की जानकारी दी। जिले में यह पहला मौका है, जब साइबर फ्रॉड के शिकार किसी व्यक्ति की इतनी बड़ी रकम वापस कराई गई है।
लक्ष्मी सागर गंगवाड़ा निवासी स्व. अनन्त कामत के पुत्र राम बहादुर कामत ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उन्हें मुंबई साइबर क्राइम का अधिकारी बनकर एक कॉल आया था। फोन करने वाले ने उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने का दावा किया और कहा कि उनके आधार कार्ड से एक फर्जी खाता खोला गया है, जिसमें गलत लेनदेन हुआ है। इसके बाद, उन्हें केनरा बैंक के अधिकारी बनकर बात करने का निर्देश दिया गया।
साइबर ठगों ने कैसे दिया था झांसा?
कुछ देर बाद, एक अन्य व्यक्ति ने खुद को केनरा बैंक का अधिकारी बताकर राम बहादुर कामत से संपर्क किया। उसने बताया कि उनके खाते में 35 लाख 74 हजार रुपये हैं, जिसे जांच के लिए तुरंत केनरा बैंक के एक अन्य खाते में स्थानांतरित करना होगा। ठग ने यह भी आश्वासन दिया कि जांच पूरी होने के एक सप्ताह के भीतर यह राशि उनके मूल खाते में वापस भेज दी जाएगी। साइबर फ्रॉड के झांसे में आकर राम बहादुर कामत ने अपनी पूरी जमा पूंजी उस खाते में स्थानांतरित कर दी। जब एक सप्ताह बाद भी पैसा वापस नहीं आया, तो उन्हें एहसास हुआ कि वे ठगी का शिकार हो गए हैं।
दरभंगा साइबर थाना की त्वरित कार्रवाई
ठगी का पता चलते ही राम बहादुर कामत ने 12 फरवरी 2026 को साइबर थाना में मामला संख्या 14/2026 दर्ज करवाया। शिकायत मिलते ही साइबर थाना के इंस्पेक्टर रंजीत शर्मा ने बिना देर किए कार्रवाई शुरू की। उन्होंने तुरंत डायल 1930 पर कॉल करवाकर स्थानांतरित की गई पूरी रकम को होल्ड करवा दिया। एसडीपीओ एसके सुमन ने बताया कि साइबर फ्रॉड द्वारा ट्रांसफर करवाई गई यह राशि संयोगवश ओडिशा राज्य के भुवनेश्वर स्थित एक संस्था के येस बैंक खाते में चली गई थी।
वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अनुसंधानक इंस्पेक्टर रंजीत शर्मा को साइबर लोकेशन के आधार पर पहले मुंबई और फिर भुवनेश्वर भेजा गया। वहां गहन जांच-पड़ताल के बाद, न्यायालय की प्रक्रिया के तहत आदेश प्राप्त किया गया, जिसके बाद राम बहादुर कामत के खाते में पूरी राशि वापस भेज दी गई।
राम बहादुर कामत ने मीडिया के सामने आने से इनकार करते हुए कहा, ‘यदि मेरा फोटो अखबार और न्यूज़ चैनल पर चलेगा तो साइबर फ्रॉड उनकी हत्या कर सकती है ऐसी स्थिति में मीडिया के सामने में आने से परहेज कर दिया।’
अनुसंधानक रंजीत शर्मा ने पुष्टि की कि राम बहादुर कामत ने लिखित रूप में यह स्वीकार किया है कि उन्हें उनकी पूरी राशि वापस मिल गई है। यह घटना साइबर अपराधों के खिलाफ सतर्कता और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करती है, साथ ही यह भी दिखाती है कि पुलिस की मुस्तैदी से पीड़ितों को न्याय मिल सकता है।







