Bihar Census: बिहार में 2027 की जनगणना की तैयारियां जोरों पर हैं। यह जनगणना सिर्फ लोगों की गिनती तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि राज्य के हर गांव और शहर की पूरी तस्वीर सामने लाएगी। इस बार ‘डिजिटल डिस्ट्रिक्ट सेंसस हैंडबुक’ (DCHB) तैयार की जा रही है, जो किसी भी इलाके की सामाजिक, आर्थिक और आधारभूत स्थिति का विस्तृत ब्योरा देगी।
इस हैंडबुक में सड़क की गुणवत्ता, बिजली-पानी की उपलब्धता, अस्पताल और बैंक जैसी बुनियादी सुविधाएं हैं या नहीं, इन सभी सवालों के जवाब एक जगह मिलेंगे। यह पहल राज्य के विकास को एक नई दिशा देने वाली है, क्योंकि इससे जमीनी स्तर पर मौजूद सुविधाओं और कमियों का सटीक आकलन हो पाएगा।
44,874 गांव और 268 शहरों की बन रही ‘कुंडली’
इस वृहद कार्य के लिए बिहार के 44,874 गांवों और 268 शहरों की सूची तैयार की गई है। अधिकारियों ने बताया कि गांवों और शहरों के लिए अलग-अलग कर्मियों की तैनाती की गई है, जो घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। प्रधान जनगणना पदाधिकारी पूरे काम की निगरानी करेंगे, जबकि जिला स्तर के अधिकारी विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करेंगे। ये अधिकारी क्षेत्र का दौरा कर मौके पर चल रहे काम की जानकारी भी लेंगे, ताकि डेटा संग्रह में कोई कमी न रहे।
डिजिटल हैंडबुक में दर्ज होंगी ये अहम जानकारियां
डिजिटल डिस्ट्रिक्ट सेंसस हैंडबुक में किसी भी इलाके की बुनियादी सुविधाओं का पूरा लेखा-जोखा शामिल होगा। इसमें स्वास्थ्य केंद्र, बिजली, सड़क, परिवहन, बैंकिंग, संचार, पेयजल और स्वच्छता की स्थिति का विस्तृत ब्योरा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जमीन के प्रकार, शहरी आधारभूत ढांचे और झुग्गी-झोपड़ियों की स्थिति पर भी जानकारी जुटाई जाएगी।
इतना ही नहीं, किसी गांव या शहर की भौगोलिक और प्राकृतिक स्थिति भी इस रिकॉर्ड का हिस्सा होगी। मौसम, जलवायु, नदियां, आहर-पईन (पारंपरिक जल निकाय) और जलाशयों की जानकारी दर्ज की जाएगी। सांस्कृतिक संस्थानों और स्थानीय उद्योगों का भी इसमें जिक्र होगा, जिससे किसी जिले और उसके गांव-शहर की समग्र तस्वीर एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेगी।
लोगों से जुड़ी विस्तृत जानकारी भी होगी शामिल
जनगणना में लोगों से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी दर्ज की जाएंगी। इसमें नाम, जाति, धर्म, लिंग, उम्र और शैक्षणिक योग्यता शामिल है। परिवार में व्यक्ति का संबंध किससे है और परिवार के मुखिया से उसका क्या रिश्ता है, यह जानकारी भी ली जाएगी। जन्मतिथि और वैवाहिक स्थिति का भी रिकॉर्ड तैयार होगा।
विवाह से जुड़ी जानकारी भी जनगणना के दौरान दर्ज की जाएगी, जिसमें शादी के समय की उम्र और पति या पत्नी का नाम शामिल है। इसके अलावा, राष्ट्रीयता, जीवित बच्चों की संख्या और महिलाओं से जुड़े प्रजनन संबंधी आंकड़े भी जुटाए जाएंगे। यह विस्तृत डेटा सामाजिक-आर्थिक नीतियों के निर्माण में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा।
लगातार होगी काम की समीक्षा, तय होंगे अगले कदम
इस बड़े अभियान की निगरानी के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं। प्रधान जनगणना पदाधिकारी नियमित रूप से इसकी समीक्षा करेंगे। जिलास्तरीय जनगणना पदाधिकारी विभागों के बीच समन्वय बनाए रखेंगे और उन्हें क्षेत्र का भ्रमण करने की जिम्मेदारी भी दी गई है। प्रभारी पदाधिकारियों को तय अंतराल पर काम की समीक्षा करने और जनगणना से जुड़े खर्च की व्यवस्था समय पर करने का निर्देश दिया गया है।
डिजिटल डिस्ट्रिक्ट सेंसस हैंडबुक तैयार होने के बाद किसी भी जिले के गांव और शहर की स्थिति को समझना आसान हो जाएगा। इसमें लोगों की संख्या से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पानी, बिजली, उद्योग और प्राकृतिक संसाधनों तक की जानकारी एक साथ उपलब्ध होगी। यानी 2027 की जनगणना में सिर्फ यह नहीं गिना जाएगा कि किसी जगह कितने लोग रहते हैं, बल्कि यह भी दर्ज होगा कि वे किन सुविधाओं के बीच रहते हैं और उनके इलाके की वास्तविक स्थिति क्या है, जो भविष्य की योजनाओं के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगा।






