Bihar Makhana Export: अगस्त 2026 में बिहार के मखाने ने वैश्विक बाजार में अपनी एक और महत्वपूर्ण पहचान बनाई है। राज्य से जीआई-टैग प्राप्त मिथिला मखाने की बड़ी खेप ऑस्ट्रेलिया, दुबई और कनाडा जैसे देशों को निर्यात की गई है, जिससे स्थानीय किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह सफलता बिहार के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
वैश्विक बाजार में बिहार मखाने की बढ़ती धाक
बिहार के बिहटा स्थित बीआईएडीए औद्योगिक क्षेत्र से अगस्त 2026 में 18 मीट्रिक टन जीआई-टैग वाले मिथिला मखाने की एक बड़ी खेप समुद्री मार्ग से ऑस्ट्रेलिया भेजी गई। यह उच्च गुणवत्ता वाला कच्चा मखाना सीधे दरभंगा जिले के मखाना उत्पादकों से प्राप्त किया गया था। इसी महीने दरभंगा जिले के बेनीपुर से 4 मीट्रिक टन मखाना दुबई के लिए भी रवाना किया गया। यह खेप बेनीपुर के धरौड़ा क्षेत्र से थी और इसमें ‘लक्ष्मी गुलाब’ किस्म का मखाना शामिल था।
इन निर्यातों से पहले, 29 जुलाई 2026 को बिहार से 7 मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाना कनाडा निर्यात किया गया था। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस जानकारी को साझा करते हुए इसे बिहार के किसानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया था। उन्होंने विशेष रूप से कहा था कि यह पहली बार है जब दरभंगा से समुद्री मार्ग के जरिए फ्लेवर्ड मखाने का कनाडा निर्यात किया गया है।
किसानों को मिला सीधा आर्थिक लाभ
इन लगातार बढ़ते निर्यातों ने बिहार के मखाने को स्थानीय तालाबों और जल क्षेत्रों से निकालकर वैश्विक बाजार तक पहुँचा दिया है। अंतरराष्ट्रीय निर्यात का सबसे बड़ा फायदा किसानों को बेहतर कीमतें मिलना है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ मखाने की खेती को भी नई आर्थिक मजबूती मिली है। जीआई टैग मिलने, आधुनिक प्रसंस्करण और समुद्री मार्ग से बड़े पैमाने पर निर्यात ने मिथिला मखाने की पहचान को एक पारंपरिक दलदली उपज से आगे बढ़ाकर वैश्विक ‘सुपर फूड’ के रूप में स्थापित करने की नई संभावनाएं पैदा की हैं।
मिथिला मखाना बना ‘सुपर फूड’
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025–26 में भारत ने अमेरिका, मध्य पूर्व और अफ्रीका समेत 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों को 7,000 मीट्रिक टन से अधिक मखाना और मूल्य वर्धित मखाना उत्पादों का निर्यात किया। घरेलू मखाना बाजार में 2021-22 से 2024-25 के बीच 17-18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। बिहार के तालाबों के गहरे पानी से निकलने वाला यह पारंपरिक उत्पाद अब देश की सीमाओं को पार कर दुनिया भर की सेहतमंद थालियों में अपनी जगह बना रहा है। मिथिला की मिट्टी और जल से निकला मखाना अब वैश्विक पहचान की ओर तेजी से बढ़ रहा है।







