Bihar Officials: मधुबनी के डीएम आनंद शर्मा पर विधायक और सांसद का फोन नहीं उठाने का मामला गरमा गया। बिहार में अब सभी सरकारी अधिकारियों को सांसद -विधायकों के फोन कॉल का तुरंत जवाब देना होगा। अगर किसी कारणवश वे फोन नहीं उठा पाते हैं, तो उन्हें तत्काल संबंधित विधायक को वापस कॉल करना होगा। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने इन सख्त निर्देशों को जारी किया है। इन आदेशों का उद्देश्य निर्वाचित प्रतिनिधियों के प्रति अधिकारियों की जवाबदेही और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना है।
सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, सचिवों, विभागाध्यक्षों, पुलिस महानिदेशकों, प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को एक विस्तृत पत्र भेजा है। इस पहल से बिहार में प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और विधायकों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार को बढ़ावा मिलेगा। यह निर्देश सीएम सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार की अधिकारियों पर जवाबदेही बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
विधायकों के पत्रों पर भी तत्काल कार्रवाई
जारी किए गए निर्देशों में मुख्य सचिव ने यह भी स्पष्ट किया है कि विधायकों द्वारा विभागों को लिखे गए पत्रों की प्राप्ति की सूचना उन्हें तुरंत दी जानी चाहिए। इसके साथ ही, पत्र पर क्या कार्रवाई की गई है और उसकी मौजूदा स्थिति क्या है, इसकी जानकारी भी एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर विधायक को उपलब्ध करानी होगी। इस कदम से विधायकों के उठाए गए मुद्दों पर समय पर कार्रवाई सुनिश्चित हो सकेगी।
सम्मानजनक व्यवहार और प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य
अधिकारियों को भेजे गए पत्र में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि जब कोई विधायक किसी अधिकारी के कक्ष में आते हैं, तो उनके पद की गरिमा के अनुसार सम्मानजनक व्यवहार और अपेक्षित प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन किया जाए। मुख्य सचिव ने सभी अधिकारियों को यह भी हिदायत दी है कि वे इन निर्देशों से अपने अधीनस्थ कार्यालयों को भी अवगत कराएं और इसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
पहले भी जारी हुए थे ऐसे निर्देश, पर नहीं हुआ पालन
यह महत्वपूर्ण निर्देश विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार के साथ 17 जुलाई को हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक के बाद जारी किए गए हैं। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब ऐसे निर्देश दिए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने इससे पहले 2012, 2017, 2018 और 2021 में भी इसी तरह के आदेश जारी किए थे, लेकिन उनका अपेक्षित पालन नहीं हो पाया था।
इस बार, सरकार की मंशा है कि इन निर्देशों का दृढ़ता से पालन हो ताकि विधायक और अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। इससे जनता से जुड़े मुद्दों का समाधान तेजी से हो पाएगा और सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकेगा।







